सलीम दुर्रानी: वो ‘प्रिंस’ जो दर्शकों की डिमांड पर छक्का मारता था
अफगानिस्तान में जन्मे एकमात्र भारतीय टेस्ट क्रिकेटर; अर्जुन पुरस्कार जीतने वाले पहले खिलाड़ी का सफरनामा
नई दिल्ली/जामनगर। भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ खिलाड़ी अपने आंकड़ों से ज्यादा अपने अंदाज के लिए जाने जाते हैं। ऐसे ही एक करिश्माई और ‘रोमांटिक’ क्रिकेटर थे सलीम दुर्रानी। 11 दिसंबर 1934 को जन्मे दुर्रानी का सफर 2 अप्रैल 2023 को थम गया, लेकिन उनकी यादें आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ताजा हैं। वे अर्जुन पुरस्कार जीतने वाले पहले क्रिकेटर थे और उन्हें 2011 में बीसीसीआई के सर्वोच्च सम्मान ‘सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से भी नवाजा गया था।
काबुल से जामनगर तक का सफर
सलीम दुर्रानी का जन्म अफगानिस्तान के एक पश्तून परिवार में हुआ था। वह महज तीन साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ काबुल छोड़कर भारत आ गए थे। उनके पिता, अब्दुल अजीज दुर्रानी भी एक पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में नवानगर (जामनगर) के जाम साहब ने उनके पिता के खेल से प्रभावित होकर उन्हें नौकरी दी, जिसके बाद परिवार जामनगर में बस गया। 1947 के विभाजन के बाद पिता पाकिस्तान चले गए, लेकिन सलीम और उनका बाकी परिवार भारत में ही रुका रहा।
‘नो दुर्रानी, नो टेस्ट’
दुर्रानी का दर्शकों के साथ रिश्ता बेहद खास था। कहा जाता है कि वे इकलौते ऐसे क्रिकेटर थे जो दर्शकों की मांग पर छक्का मारा करते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि 1973 में जब उन्हें कानपुर टेस्ट के लिए टीम से बाहर किया गया, तो दर्शक विरोध में तख्तियां लेकर स्टेडियम पहुँच गए। उन तख्तियों पर लिखा था— “नो दुर्रानी, नो टेस्ट” (No Durrani, No Test)।
ऐतिहासिक जीत के नायक
सलीम दुर्रानी एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे।
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इंग्लैंड सीरीज (1961-62): वे भारत की जीत के असली हीरो थे। उन्होंने कोलकाता और चेन्नई टेस्ट में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी थी।
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वेस्ट इंडीज जीत (1971): पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत की ऐतिहासिक जीत में उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों के विकेट झटके थे।
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आंकड़े: अपने 50 टेस्ट पारियों में उन्होंने 1,202 रन बनाए (जिसमें 1 शतक शामिल है) और 75 विकेट लिए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 14 शतक और 8,545 रन दर्ज हैं।
क्रिकेट के बाद बॉलीवुड का रुख
सलीम दुर्रानी न केवल मैदान पर, बल्कि रुपहले पर्दे पर भी अपने करिश्मे के लिए जाने गए। अपने गुड लुक्स और स्टाइल के कारण उन्होंने बॉलीवुड में भी हाथ आजमाया।
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फिल्म ‘एक मासूम’ (1969) में उन्होंने तनुजा के साथ अभिनय किया।
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फिल्म ‘चरित्र’ (1973) में वे परवीन बाबी के साथ नजर आए।
अंतिम सफर
2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की आयु में कैंसर के कारण इस महान क्रिकेटर का निधन हो गया। वे अपने अंतिम दिनों में जामनगर में अपने भाई जहांगीर दुर्रानी के साथ रह रहे थे। जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर की सर्जरी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। 14 जून 2018 को जब भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक टेस्ट मैच हुआ, तो वे वहां बतौर गवाह मौजूद थे, क्योंकि वे अफगानिस्तान में जन्मे एकमात्र भारतीय टेस्ट क्रिकेटर थे।
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