नूर अहमद नूर:
जिसे तालिबान ने भारत में सौंपी अफगान दूतावास की कमान, जानिए कौन हैं?
विदेश मंत्री मुत्ताकी के दौरे के बाद बदले समीकरण, नई दिल्ली पहुंचे नूर
नई दिल्ली। अफगानिस्तान और भारत के रिश्तों में एक नया मोड़ आया है। अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के अक्टूबर में भारत के सात दिवसीय दौरे के बाद, तालिबान सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का ‘चार्ज डी’अफेयर्स’ (CDA) नियुक्त किया है।
अब सवाल यह है कि आखिर नूर अहमद नूर कौन हैं, जिन पर तालिबानी शासन ने इतना बड़ा भरोसा जताया है?
कौन हैं नूर अहमद नूर?
नूर अहमद नूर तालिबानी शासन के एक वरिष्ठ सदस्य हैं और कूटनीतिक हलकों में जाना-माना नाम हैं।
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अनुभव: वह अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में ‘फर्स्ट पॉलिटिकल डिवीजन’ के पूर्व महानिदेशक रह चुके हैं।
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विशेषज्ञता: वह दक्षिण एशिया मामलों को संभालने में माहिर माने जाते हैं।
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ताजा अपडेट: रिपोर्ट्स के मुताबिक, नूर अहमद नूर अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
दोनों देशों के बीच बेहतर होते रिश्ते
गौरतलब है कि अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी अक्टूबर में भारत आए थे। उनके साथ नूर अहमद नूर भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध पहले से बेहतर हुए हैं।
इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी के बीच एक अहम समझौता हुआ था। इसके तहत नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के लिए इस्लामिक अमीरात (तालिबान) द्वारा नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने पर सहमति बनी थी। हालांकि, भारत ने अभी तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता (Official Recognition) नहीं दी है।
गनी सरकार के राजनयिकों की जगह लेंगे
अभी तक नई दिल्ली स्थित दूतावास में पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार द्वारा नियुक्त सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल ‘चार्ज डी’अफेयर्स’ का पद संभाल रहे थे। वहीं, मुंबई और हैदराबाद स्थित अफगान वाणिज्य दूतावास (Consulates) पहले से ही तालिबान द्वारा नियुक्त राजनयिकों के जरिए संचालित हो रहे हैं।
अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के लगभग पांच साल बाद अब दिल्ली दूतावास में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
बांग्लादेश दौरे से चर्चा में आए थे नूर
नूर अहमद नूर की कूटनीतिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पिछले साल दिसंबर 2025 में बांग्लादेश का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां कई इस्लामी नेताओं से मुलाकात की थी। बांग्लादेश चुनाव से ठीक पहले उनकी इस यात्रा को वहां की मीडिया ने बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बताया था।
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