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कुरैशी समाज की ‘नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर’ मुहिम का दिखने लगा असर:

जयपुर

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फिजूलखर्ची पर लगी लगाम

समाजसेवी छुट्टन कुरैशी और नईम कुरैशी की पहल से बची करोड़ों की रकम

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। मुस्लिम समाज में दिखावे और फिजूलखर्ची के खिलाफ शुरू की गई एक मुहिम अब रंग लाने लगी है। कुरैशी समाज की “नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर” मुहिम का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

इस बदलाव की शुरुआत 24 दिसंबर 2024 को जयपुर के झोटवाड़ा में हुई थी, जब समाजसेवी और मुस्लिम व्यवसायी छुट्टन कुरैशी की बेटी और जमीयतुल कुरैश राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष नईम कुरैशी के बेटे का निकाह बेहद सादगी से हुआ था। तब से लेकर आज तक समाज के सैकड़ों जोड़ों ने इस राह को चुना है, जिससे समाज का करोड़ों रुपया बर्बाद होने से बचा है।

दिखावे की परंपरा पर चोट

मुस्लिम समाज वर्तमान में दिखावे की परंपरा से पीड़ित हो गया है। लोग बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा पैसा शादियों की चकाचौंध पर खर्च कर रहे हैं। कई परिवार तो बराबरी करने के चक्कर में कर्ज लेकर महंगी शादियां करते हैं और फिर जीवन भर आर्थिक तंगहाली में जीते हैं।

लेकिन छुट्टन कुरैशी और नईम कुरैशी ने एक मिसाल पेश की। दोनों परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद उन्होंने “नो गार्डन, नो दहेज, नो डिनर” को आधार बनाया। निकाह में आए मेहमानों का स्वागत सिर्फ खजूर और शरबत से किया गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार खुद इस सादगी के लिए राजी थे ताकि समाज को दहेज जैसी कुप्रथा से बाहर निकाला जा सके।

जनवरी 2026 में फिर दिखी सादगी की झलक

कुरैशी समाज में पिछले एक साल में करीब 100 ऐसे निकाह हो चुके हैं। हाल ही में जनवरी में फिर इसके उदाहरण देखने को मिले:

  • 6 जनवरी 2026: झोटवाड़ा निवासी मेराज कुरैशी के पुत्र सोहेल का निकाह एमडी रोड निवासी नासिर कुरैशी की पुत्री अंजुम के साथ सादगी से हुआ।

  • 8 जनवरी 2026: झोटवाड़ा निवासी मेराज कुरैशी की पुत्री का निकाह रामनगर (शास्त्री नगर) निवासी जहीरूद्दीन के पुत्र जुनैद के साथ संपन्न हुआ।

मुहिम के फायदे: शिक्षा और व्यापार पर फोकस

बिना दहेज और बिना गार्डन की शादियों से परिवारों का लाखों रुपया बच रहा है, साथ ही इंतजाम में बर्बाद होने वाला समय भी। कांग्रेस नेता और जमीयतुल कुरैश यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान कुरैशी ने कहा कि सादगी से शादियां करने से जो पैसा बच रहा है, उसे बच्चों की उच्च शिक्षा और नए व्यवसाय शुरू करने में लगाया जा सकता है। इससे समाज का वास्तविक विकास संभव होगा।

कायमखानी समाज में भी सादगी की पहल

कुरैशी समाज की तरह अब कायमखानी बिरादरी में भी यह जागरूकता आ रही है।

जुमा के रोज, 9 जनवरी 2026 को बड़ी मस्जिद, जालूपुरा (जयपुर) में बाद नमाज़-ए-असर एक सादगी भरा निकाह हुआ। मरहूम हाजी अब्दुल शकूर खान पहाड़ियान के पोते (अकरम के बेटे) अल मोहम्मद साजीद का निकाह मरहूम अब्दुल जब्बार खान मलकान की पोती (आबिद अली की बेटी) शीरीन अली खान के साथ हुआ।

यह निकाह बिना बैंड-बाजा, बिना बारात, बिना दहेज और बिना भारी लेन-देन के पूरी तरह सुन्नत के मुताबिक हुआ। मुफ्ती मोहम्मद शफीक कायमखानी साहब ने निकाह पढ़ाया और मौलवी नसीबुद्दीन साहब ने इसे सुन्नत के मुताबिक करने की नसीहत दी। समाज के लोगों ने इस नेक पहल के लिए दोनों परिवारों को मुबारकबाद दी।

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