कुंडों का त्योहार सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है: पठान
त्योहार का उद्देश्य और महत्व
मनोहरपूर (रॉयल पत्रिका)। काँग्रेसी नेता नदीम खान पठान ने कहा कि कुंडों का त्यौहार मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व आस्था और अकीदत के साथ मनाया जाता है।
किसकी याद में मनाया जाता है?
यह त्योहार हजरत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.) की याद में मनाया जाता है। मान्यता है कि उनकी वसीले से मांगी गई दुआओं और मन्नतों से मुरादें पूरी होती हैं। इस दिन विशेष रूप से मिट्टी के कुंडे (बर्तन) में खीर, पूड़ी और मीठी टिकिया भरकर फातिहा दिलाई जाती है।
इस त्योहार के मुख्य बिंदु
त्योहार की रस्में और समय को लेकर कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:
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कब मनाया जाता है: इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने की 22 तारीख को।
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क्या किया जाता है: मिट्टी के नए कुंडे (बर्तन) खरीदे जाते हैं। इन कुंडों में खीर, पूड़ी, मीठी टिकिया और अन्य मिठाइयां भरकर रखी जाती हैं।
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फातिहा का समय: फजर (सुबह की नमाज) के बाद कुंडे पर फातिहा दिलाई जाती है और दुआ मांगी जाती है।
आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक
यह आस्था का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो विशेषकर लड़कों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मन्नतें मांगने से जुड़ा है। नदीम खान पठान ने बताया कि यह त्योहार सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिसमें लोग अपने घरों को सजाते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयों का प्रसाद बांटते हैं, जिससे समाज में भाईचारा बढ़ता है।
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