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ईरान में तख्ता पलट की तैयारी:

जयपुर

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अमेरिका और इज़राईल कर रहे पूरी कोशिश, क्या सफल होगी साजिश?

अमेरिका और इज़राईल का प्लान

ईरान में तख्ता पलट होगा! इज़राईल और अमेरिका ईरान में तख्ता पलट करवाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वक्तव्यों से पता चलता है कि ईरानी प्रदर्शनकारी यदि थोड़ा भी सफल होते हैं, तो अमेरिका उनकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान को बार-बार धमकी दे रहे हैं। वहीं, इज़राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के प्रदर्शनकारियों से अपील कर रहे हैं कि अब उनको गुलामी से आजाद होने का समय आ गया है।

परमाणु कार्यक्रम: असली डर की वजह

वर्तमान में अमेरिका को सबसे ज्यादा चुनौती ईरान से मिल रही है। ईरान अमेरिका से न तो खौफ़ खा रहा है और न ही बात करने पर राज़ी हो रहा है। अमेरिका और इज़राईल ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर विराम चाहते हैं, लेकिन ईरान बिना किसी की चिंता किए अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से बढ़ा रहा है।

अमेरिका को डर है कि यदि ईरान परमाणु तकनीक हासिल कर लेता है तो विश्व में शक्ति संतुलन तेजी से बदलने लगेगा। इसलिए इज़राईल और अमेरिका ईरान को किसी भी सीमा तक जाकर परमाणु बम बनाने से रोकना चाहते हैं। ईरान की मिसाइल क्षमता से पहले ही अमेरिका और इज़राईल भयभीत दिखाई दे रहे हैं।

मुस्लिम देशों का बदलता रुख

ईरान को नियंत्रित नहीं करने के कारण अमेरिका की मुस्लिम देशों पर मजबूत पकड़ अब ढीली पड़ने लगी है। पश्चिमी एशिया के मुस्लिम देश, जो कभी अमेरिका के पिछलग्गू हुआ करते थे, अब धीरे-धीरे उसके चंगुल से निकलने की कोशिश करने लगे हैं।

तुर्की, सीरिया, सऊदी अरब, मिस्र, ईराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया सहित अन्य मुस्लिम देश अब पूरी तरह अमेरिका पर निर्भरता घटा रहे हैं और चीन एवं रूस से संबंध बढ़ा रहे हैं। यदि परमाणु बम ईरान ने हासिल कर लिया तो पश्चिमी एशिया और मुस्लिम देशों का परिदृश्य तेजी से बदलने लगेगा।

इज़राईल की कमजोर होती स्थिति

अमेरिका को सबसे ज्यादा झटका इज़राईल के कमजोर होने से लगा है। इज़राईल के द्वारा अमेरिका मुस्लिम देशों को नियंत्रित करता रहता था, लेकिन इज़राईल अब इतना कमजोर हो गया है कि वह हमास और हिज्बुल्लाह जैसे हथियारबंद क्षेत्रीय संगठनों से भी हारने लगा है।

इज़राईल को बचाने के लिए अमेरिका को बड़ी तादाद में हथियार और धन देना पड़ रहा है। इज़राईल से अब कोई भी मुस्लिम देश नहीं डरता है। ईरान से 12 दिन के युद्ध में इज़राईल की एक तरह से कमर टूट चुकी है।

क्या तख्ता पलट संभव है?

ईरान में विद्रोही गुटों द्वारा बगावत होने के बाद भी ईरानी सरकार को कोई बड़ा खतरा दिखाई नहीं दे रहा है। दूसरी तरफ, रूस और चीन ईरान की पूरी तरह सहायता कर रहे हैं। वे ईरान को जरूरी अत्याधुनिक हथियार देने के साथ-साथ उसके साथ व्यापार भी बढ़ा रहे हैं। तुर्की और सीरिया भी ईरान की सहायता कर रहे हैं।

मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा के लिए नए-नए गठबंधन बना रहे हैं, क्योंकि अमेरिका से सुरक्षा समझौतों से उनका भरोसा उठ गया है। मुस्लिम देशों में तुर्की तेजी से सैन्य ताकत बनकर उभर रहा है जो अमेरिका के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए, इज़राईल और अमेरिका की ईरान में तख्ता पलट की कोशिश आसान नहीं दिखाई दे रही है।

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