घर बैठे इस्लामाबाद-कराची साफ:
ब्रह्मोस से भी तेज ‘ध्वनि’ मिसाइल तैयार, 2026 की पहली तिमाही में होगा टेस्ट
DRDO की बड़ी कामयाबी — मैक 6 की रफ्तार, रडार को चकमा देने में माहिर
नई दिल्ली। 21वीं सदी का सैन्य टकराव 20वीं सदी के युद्ध से कई मायनों में अलग है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला, ईरान पर कार्रवाई हो या रूस-यूक्रेन और इजरायल-गाजा युद्ध, इन सबमें एक बात कॉमन है- ‘एरियल स्ट्राइक’। अब आर्मी से ज्यादा एयरफोर्स ड्राइविंग सीट पर है। इसी होड़ में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर ली है।
‘ध्वनि’ (Dhvani): भारत का नया ब्रह्मास्त्र
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ‘ध्वनि’ हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) डेवलप करने में जुटा है। यह मिसाइल भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को नई ऊंचाई देगी।
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बड़ा अपडेट: DRDO वर्ष 2026 की पहली तिमाही में ‘ध्वनि’ हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का पहला उड़ान परीक्षण करने जा रहा है।
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ग्लोबल क्लब: इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा, जो पहले से ही हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में महारत रखते हैं।
रडार और एयर डिफेंस सिस्टम होंगे फेल
दुनिया भर के देश ऐसे वेपन सिस्टम पर फोकस कर रहे हैं जो रडार को चकमा दे सकें। भारत की ‘ध्वनि’ इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
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रफ्तार: इसकी खासियत यह है कि यह मैक 6 (Mach 6) यानी ध्वनि की गति से छह गुना से भी ज्यादा रफ्तार से उड़ान भर सकती है। इसकी गति लगभग 7400 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
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चकमा देने में माहिर: इतनी तेज गति के साथ-साथ यह रास्ते में तीखे मोड़ लेने और दिशा बदलने में भी सक्षम है, जिससे दुश्मन की ‘मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ के लिए इसे इंटरसेप्ट करना या रोकना नामुमकिन हो जाता है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
‘ध्वनि’ एक अत्याधुनिक बूस्ट-ग्लाइड सिस्टम पर आधारित है।
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इस प्रणाली में पहले एक रॉकेट बूस्टर व्हीकल को बहुत ऊंचाई तक ले जाता है।
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इसके बाद यह उससे अलग होकर वायुमंडल के भीतर बेहद तेज गति से फिसलता (Glide) हुआ आगे बढ़ता है।
रणनीतिक महत्व: इसकी रेंज और रफ्तार इतनी होगी कि दिल्ली में बैठकर कुछ ही मिनटों में दुश्मन के अहम ठिकानों (जैसे कराची और इस्लामाबाद) को निशाना बनाया जा सकता है। यह मौजूदा रडार सिस्टम की पकड़ में आसानी से नहीं आएगी।
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