Loading...

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच ‘मंदिर राजनीति’:

कोलकाता

Follow us

Share

चुनाव पर क्या होगा असर?

भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने बनाई हिंदुओं के वोट साधने की योजना

कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर राजनीति एक बार फिर तेज़ होती दिख रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के मंदिर और सांस्कृतिक परिसरों से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सियासी टकराव को और गहरा कर दिया है।

‘दुर्गा आंगन’ परियोजना: एक बड़ा दांव

30 दिसंबर को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में ‘दुर्गा आंगन’ नामक सांस्कृतिक परिसर की आधारशिला रखी। यह परियोजना दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मिली मान्यता के सम्मान से जोड़ी जा रही है।

परियोजना की मुख्य बातें:

  • क्षेत्रफल: 17 एकड़ से अधिक।

  • लागत: लगभग 262 करोड़ रुपये।

  • मंदिर: परिसर में दुर्गा मंदिर के साथ शिव, गणेश, कार्तिक, सरस्वती और लक्ष्मी के मंदिर भी होंगे।

ममता बनर्जी ने इस मौके पर कहा, “दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, यह बंगाल की संस्कृति और विरासत का हिस्सा है। इसे संरक्षित करना हमारी ज़िम्मेदारी है।”

बीजेपी का आरोप: यह चुनावी तुष्टिकरण है

बीजेपी ने इस परियोजना को चुनावी स्टंट करार दिया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि टीएमसी चुनाव से पहले हिंदू भावनाओं को साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “ममता बनर्जी की ‘दुर्गा आंगन’ परियोजना उनकी राजनीति की तरह तुष्टिकरण में डूबी हुई है। यह बंगाली हिंदुओं की आस्था का मज़ाक है और भक्ति को वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”

ममता का पलटवार: मैं सच्ची धर्मनिरपेक्ष हूं

ममता बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “जब कोई धार्मिक सहायता के लिए आता है, चाहे हिंदू हो, मुस्लिम, जैन, ईसाई या पारसी, तो कुछ लोग कहते हैं कि मैं तुष्टिकरण करती हूं। मैं सच्चे मायनों में धर्मनिरपेक्ष हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “आप मुझे एक भी धर्म नहीं दिखा सकते जिसके कार्यक्रम में मैं नहीं जाती। गुरुद्वारे में जाती हूं तो सिर ढकती हूं, तब कोई आपत्ति नहीं करता। फिर ईद के कार्यक्रम में जाने पर आपत्ति क्यों होती है?”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दीघा में जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई थी और सरकार के मुताबिक जनवरी के दूसरे सप्ताह में उत्तर बंगाल में महाकाल मंदिर की आधारशिला भी रखी जाएगी।

विशेषज्ञों की राय: बीजेपी को उसी के मैदान पर ललकार

कोलकाता स्थित राजनीतिक विशेषज्ञ मैदुल इस्लाम का कहना है, “ममता अब बीजेपी को उसी के मैदान पर ललकार रही हैं, वे खुद ब्राह्मण हैं। वे वोटिंग पैटर्न को बहुत अच्छे से समझती हैं। पिछले दस सालों से बीजेपी उन्हें हिंदू-विरोधी साबित करने में जुटी है। अब राज्य में वामपंथी राजनीति कमजोर हो गई है, इसलिए यह मुकाबला सीधा हो गया है।”

बाबरी मस्जिद की छाया और हुमायूं कबीर

मंदिर राजनीति के बीच बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी बंगाल की राजनीति में उभरा है।

  • मस्जिद विवाद: टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद ज़िले में एक मस्जिद की आधारशिला रखी थी, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

  • अमित शाह का बयान: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मंदिर और मस्जिद की राजनीति कौन कर रहा है? एक पूर्व टीएमसी विधायक और दूसरी खुद टीएमसी। बंगाल की जनता को फैसला करना होगा कि चुनाव नजदीक आने पर यह कितना उचित है।”

  • नई पार्टी: 22 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने नई पार्टी बनाने की घोषणा की और कहा कि मुस्लिम समुदाय अब अपना प्रतिनिधित्व चाहता है।

वोट बैंक का गणित

विशेषज्ञों का मानना है कि ममता का हिंदुत्व बीजेपी के हिंदुत्व से अलग है। यह बंगाली देवी-देवताओं (जगन्नाथ, महाकाली, दुर्गा) पर केंद्रित है। मैदुल इस्लाम के अनुसार, “चूंकि मुस्लिमों के पास टीएमसी के अलावा कोई मजबूत विकल्प नहीं है, इसलिए ममता ने गणना की है कि वे वोट तो देंगे ही, इसलिए अब हमें हिंदू वोटों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।”

रबीन्द्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रबर्ती ने कहा, “पश्चिम बंगाल ने धीरे-धीरे हिंदी बेल्ट की राजनीति अपना ली है। यह अब मुद्दा-आधारित राजनीति से हटकर पहचान-आधारित (धर्म और जाति) राजनीति की ओर बढ़ गया है।”

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।