क्या संविधान को कमजोर करने या बदलने की कोशिश की जा रही है?
संसद में चर्चा हो रही है कि देश के संविधान को कैसे बचाया जाए। देश में संविधान को लागू हुए 75 वर्ष हो गए हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी जोर शोर से आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी देश के संविधान को बदलना चाहती है। भाजपा देश के संविधान को बदलकर मनुस्मृति के हिसाब से देश चलाना चाहती है। देश का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। जिसमें गरीब, मजदूर धार्मिक अल्पसंख्यकों का एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के अधिकारों के संरक्षण का प्रावधान है। आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए जातिगत अछूतों के लिए आरक्षण का प्रावधान है जिससे उनका मुख्य धारा में ला सकें। लेकिन वर्तमान में देश की सरकार संविधान के मुताबिक चलती दिखाई नहीं दे रही है। दलितों, अल्पसंख्यकों, किसानों एवं युवाओं के हितों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। विपक्षी नेता राहुल गांधी सहित दर्जनों विधि विशेषज्ञों, टॉप रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट एवं विद्वानों का कहना है कि न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग एवं ब्यूरोक्रेसी को सरकार अपने स्वार्थ साधने में काम ले रही है। यही कारण है कि देश का प्रजातंत्र खतरे में दिखाई देने लगा है। न्यायपालिका में एक विचारधारा के न्यायाधीश दिखाई देने लगे हैं। जो संविधान पढ़कर उच्च पदों तक पहुंचे हैं। लेकिन उसके विपरीत कोर्ट निर्णय बहुसंख्यकों के हितों के आधार पर करने की बात कर रहे हैं। ऐसे जजों की न्यायपालिका में कमी नहीं है जो संविधान के विपरीत कोर्ट निर्णय, जाति, धर्म एवं वर्ग देखकर करने लगे हैं। देश में ईवीएम से चुनाव का विरोध होने लगा है। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में ईवीएम से सरकार बनने को लेकर बड़ी-बड़ी रैलिया निकाली जा रही हैं। लेकिन चुनाव आयोग उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग धड़ल्ले से हो रहा है।
मध्य प्रदेश में ईडी के दबाव में एक उद्योगपति ने आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ईडी ने उसे भाजपा ज्वाइन करने के लिए दबाव बनाया। इसी तरह अल्पसंख्यकों की धार्मिक आजादी, छीनने के दर्जनों उदाहरण हैं। विपक्षी नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आशंका जताई है कि भाजपा देश में संविधान के बजाय मनुस्मृति से चलाना चाहती है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी ने संविधान में अनेक संशोधन किए। कांग्रेस ने संविधान को कई बार बदला। देश की जनता सत्ताधारी एवं विपक्षी दलों के नेताओं को सुन रही है और समझ रही है कि किस पार्टी एवं नेता की मंशा क्या है। संविधान को बदलना कुछ पार्टियों और विचारधारा के लोगों के लिए जरूरी है और संविधान बदलने की उनकी कोशिश चल भी रही है। लेकिन यह भी सही है कि देश की बहूजातीय एवं बहुसांस्कृतिक समाजों के विरोध के कारण संविधान बदलने की इच्छाओं और प्रयासों की खुलकर नहीं बताया जा रहा है। यदि संविधान बदलने की इच्छा रखने वाली पार्टियों और संगठनों को पर्याप्त समय मिलता है तो संविधान को जरूर बदला जाएगा। अभी धीरे-धीरे संविधान को कमजोर करने की सतत प्रक्रिया जारी है।
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