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मेवात की शाही स्थापत्य कला की महान धरोहर :फतेह जंग का गुम्बद

Jaipur

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बात मेवात की……

(अलवर) बाबर के ख़िलाफ़ हुए खानवा की जंग(1527) के ज़ाबाज़ योद्धा, मुख्य सेनापति और वली ए मेवात के नाम से प्रसिद्ध शहीद हसन ख़ान मेवाती(1504-1527) के वंशज़ और 5वें मुग़ल बादशाह शाहजहाँ (1592-1666) के विश्वसनीय दरबारी ,प्रभावशाली मंत्री और मेवात क्षेत्र के गवर्नर फतेहजंग मेवाती की 1647 में मृत्यु के बाद उनकी स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से मेवात की राजधानी अलवर में अन्य मुगलकालीन मक़बरों की भांति एक विशाल ऊँचे चबूतरे पर लाल बलुवा पत्थरों से चार बाग पद्धति और इंडो-इस्लामिक शैली में 5 मंजिला एक भव्य मक़बरे का निर्माण मेवाती शाही परम्परा की शान का प्रतीक था।वर्तमान में ‘फतेह गुंबद’ के नाम से यह मक़बरा अलवर रेलवे जंक्शन के बहुत पास ही मेवाती शाही विरासत के रूप में शोभायमान है।  मक़बरे की प्रथम तीन मंज़िलो की लंबाई चौड़ाई और ऊँचाई एक जैसी होने तथा प्रत्येक दिशा में 5-5 महराबों और 2-2 खिड़कियों के साथ दीवारों पर नक़्क़ाशी, पच्चीकारी, और कैलीग्राफी में भी लगभग समानता है…प्रथम तीन मंज़िलो के मेहराबों और अंदर के अहाते में क़ुरआन की आयतों की खत्ताती रूह को छूने लगती है…अंतिम 5वीं मज़िल में चारों तरफ़ एक जैसी कलात्मक शैली में 28 मेहराबों का निर्माण मेवाती शाही परम्परा के बेजौड़ गौरव को दर्शाता है।ख़ास बात यह है कि मक़बरें में ऊपर चढ़ने के लिये चारों ओर अलग अलग चार रोमांचक ज़ीनो का निर्माण हुआ है।मक़बरे के उपरी चारों कोनों पर सुदृढ़ मीनारों के साथ बीच में विशाल व भव्य गुंबद का निर्माण तो मक़बरे को चार चाँद ही लगा देता है।स्थानीय राजपूत शैली में चारों ओर छज्ज़े और अंतिम भाग में छतरियों का निर्माण गुम्बद की भव्यता और सौन्दर्य को कालजयी बनाता प्रतीत होता हैं।

लेकिन दुर्भाग्यवश, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के संरक्षण के बावजूद अलवर क्षेत्र में मेवाती स्थापत्य की भव्य विरासत का प्रतीक यह ऐतिहासिक मक़बरा अब जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है …इसके शीर्ष भाग पर स्थित छतरी कुछ समय पहले ही गिर चुकी है…यह हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि साझी विरासत की इस महान ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की भी साझा कोशिश करें।।

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