नफरत के शिकार मुस्लिम और छिनते नागरिक अधिकार
– डॉ. एस. खान
संवैधानिक दृष्टि से देश का मुसलमान भी उतने ही अधिकार रखता है जितना देश के अन्य नागरिकों के है। लेकिन जब से केन्द्र में भाजपा की सरकार आयी है तब से लगातार मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। यह नफरत हर जगह नजर आती है। देश में कहीं भी साम्प्रदायिक दंगा होता हैं तो पुलिस और प्रशासन का मुस्लिमों से नफरत का चेहरा साफ नजर आता है। पुलिस का रवैया मुसलमानों के ज़ाती दुश्मनों जैसा नजर आने लगता है। सत्ताधारी दल में बैठे लोग ऐसा माहौल बनाते हैं कि जैसे मुसलमान इस देश के नागरिक नहीं हैं बल्कि इस देश के दुशमन हो। हद तब हो जाती है जब संविधान की रक्षा करने वाली न्यायपालिका में बैठे जज खुले आम मुसलमानों के खिलाफ नफरती बयान बाजी करते हैं। अभी हाल ही में इलाहबाद हाईकोर्ट के सिटिंग जज ने विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से कहा कि यह देश बहुसख्यकों की मर्जी से चलेगा। यानि जिस जज ने संविधान की सुरक्षा की शपथ ली थी वह खुले आम देश के संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहा था और ऐलान कर रहा था कि देश अब संविधान से नहीं बल्कि बहुसंख्यकों की मर्जी से चलेगा। इसमें भी हैरानी की बात यह थी कि इस जज के गैर संवैधानिक बयान के पक्ष में भाजपा और वे लोग साथ खडे हो गये जो देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। इससे यह साबित होता है कि प्रशासन और न्यायपालिका में ऐसे लोग आ गये हैं जो मुसलमानों से नफरत करते हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों को छीन लेना चाहते हैं। मुसलमानों से नफरत करने वालों, नफरतबाजो के इस गिरोह ने समाज को भी इतना जहरीला बना दिया है कि हर जगह मुसलमानों से नफरत करने वालों का एक गैंग खड़ा हो गया है। (कुछ उदाहरण से इसे समझा जा सकता है) देश का संविधान कहता है कि कोई भी देश का नागरिक देश में कहीं भी रह सकता है। किसी भी जगह वह अपनी मर्जी का घर खरीद सकता है। अपनी इच्छा से अपने धर्म की पालना कर सकता है। लेकिन इसके उल्टा हो रहा है। हाल ही में यूपी के मुरादाबाद की एक हाऊसिंग सोसाइटी में एक मुस्लिम डॉक्टर ने घर खरीद लिया तो सोसाइटी के हिन्दू इसके विरोध में सड़कों पर उतर आये और इतना विरोध किया कि मुस्लिम डॉक्टर को वह घर बेचना पड़ा। ऐसे वाकिये हर शहर में हो रहे है। मुसलमान हिन्दू बहुल इलाकों में घर नहीं खरीद सकता है। उत्तराखण्ड में तो इससे भी बढ़कर हुआ। कुछ लोग अपने घर में जुम्मे की नमाज पढ़ते थे। इस पर भी नफरती गैंग को ऐतराज हुआ कि घर में नमाज नहीं पढ़ने देंगें और विरोध में सड़कों पर उतर आये। इससे साफ जाहिर होता है कि नफरती गैंग ताकत के बल पर मुसलमानों के संविधान में दिये नागरिेक अधिकारों को छीन रहे हैं। कभी कुंभ में मुसलमानों को दुकानें नहीं लगाने देने का ऐलान होता है तो कभी मुसलमानों से कोई सामान ना खरीदने का ऐलान होता है और यह सब कुछ खुले -आम हो रहा है। ऐसी नफरत फैलाने वालो के खिलाफ न कोई कार्यवाही होती है और न ही कहीं से मुसलमानों को भरोसा मिलता है कि उसके संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत की जायेगी। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल भी बस रस्म अदा करने के लिए बयान जारी कर देते है। अब सवाल यह है कि नफरत के इस माहौल में मुसलमान क्या करे ? सवाल यह भी है कि संविधान में दिये इन अधिकारों की हिफाजत कैसे हो ? आज देश में संविधान खतरे में है। मुसलमानों को दबाया जा रहा है। उसके अधिकारों पर हमला हो रहा है तो क्या संविधान को बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ मुसलमानों की ही है ? या देश के बाकी नागरिकों को भी अब खुल कर सामने आना चाहिये। अब समय आ गया है कि जो भी नागरिक देश से प्रेम करता है। उसे अब देश को बचाने और देश के संविधान को बचाने के लिए मुखर होकर इस नफरती गैंग के खिलाफ आवाज बुलन्द करनी चाहिये। जो देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं और उनके नागरिक अधिकारों को छीन रहे हैं।
यह सब मुसलमानों के खिलाफ हो रहा है। कल ऐसा ही दलितों के साथ होगा। पिछड़ों के साथ होगा। किसानों के साथ होगा। इसलिए धर्म निरपेक्षता में यकीन रखने वाले लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी चुप्पी को तोड़ें। उनकी यह खामोषी देश की तरक्की को रोक रही है। कोई देश तब तक विकास नहीं करता है जब तक उस देश के सभी नागरिको के साथ समान व्यवहार न हो। मुसलमान भी इस देश का नागरिक है । देश की आजादी की लड़ाई से लेकर देश के विकास में उसकी बराबर की भागीदारी है। आज भी देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं। बढ़ती हुई बेरोजगारी है, आसमान छूती महंगाई, लेकिन इन सबका जिम्मेदार भी मुसलमानों को ठहरा दिया जाता है। इसलिए समय है कि देश की जनता इस नफरत फैलाने वाली गैंग का विरोध करे । मुसलमानों के नागरिक अधिकारों की लड़ाई को लड़े। आज अगर इस माहौल में धर्म निरपेक्ष विचारधारा को मानने वाले लोगों नेे भी मुसलमानों को अकेला छोड़ दिया तो पूरे समुदाय में निराषा आ जायेगी और देश की इतनी बड़ी आबादी में यदि निराषा आ जाये तो क्या भारत विष्व गुरू बन सकता है ? अगर देश को विष्व गुरू बनाना है तो इस नफरती गैंग को हराना ही होगा और यह सब सामुहिक प्रयासो से हो सकता है।
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