Loading...

दूसरे धर्म के लोगों और अल्पसंख्यकों की मोबलीचिंग सिर्फ एक उन्माद है!

जयपुर

Follow us

Share

मोबलीचिंग का खतरा — अपनों पर ही वार?

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजनीति के चलते आजकल ऐसी उन्मादी भीड़ तैयार की जा रही है, जो एक इशारे पर उस सोची समझी घटना को अंजाम दे दे, जिससे राजनीतिक, आर्थिक एवं धार्मिक लाभ उठाया जा सके।

क्यों खतरनाक है यह प्रवृत्ति?

मोबलीचिंग वाली उन्मादी भीड़ अपने ही धर्म के उन लोगों के लिए खतरे पैदा करती है जो विदेश, दूसरे राज्यों एवं दूसरे स्थानों पर अपनी रोज़ी-रोटी के लिए कमाई करने जाते हैं।

बांग्लादेश का उदाहरण: सत्ता की भूख और अराजकता

वर्तमान में बांग्लादेश में ऐसा ही हो रहा है, यहां हिंदुओं के खिलाफ एजेंडा चलाया जा रहा है। बांग्लादेश में वर्षों से भारत समर्थक शेख हसीना की सरकार थी। विरोधियों ने भारत और हिंदुओं के खिलाफ एजेंडा चलाया और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को अपदस्थ किया।

  • हिंदुओं की मोबलीचिंग की गई, जिसका नुकसान बांग्लादेश को हुआ।

  • कोई भी बांग्लादेशी नागरिक अब भारत में सुरक्षित नहीं रह सकता है।

  • भारत से आर्थिक, राजनीतिक एवं सुरक्षा के फायदे मिलना कम हो रहे हैं या बंद हो गए।

लेकिन बांग्लादेश में उन्मादी भीड़ का नेतृत्व करने वालों को सिर्फ सत्ता चाहिए, जो उनको मिलने जा रही है। बांग्लादेश अंदरुनी रूप से आंदोलनों, तोड़-फोड़ एवं उत्पात का देश बनता जा रहा है और भारत विरोध वहां की राजनीति का सब्जेक्ट बन गया है।

भारत में मोबलीचिंग और उत्पात: क्रिसमस पर घटनाएं

25 दिसंबर को क्रिसमस पर्व के अवसर पर धार्मिक लोगों के कई संगठनों ने ईसाइयों के चर्चों और समारोह में जाकर उत्पात मचाया और तोड़फोड़ की। यह उन्मादी समूह दूसरे धर्मों के लोगों को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं।

वैश्विक छवि और प्रवासी भारतीयों पर असर

भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है। यहां सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखा जाता है। भारत देश के लाखों हिंदू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई दूसरे देशों में व्यापार, शिक्षा लेने एवं मज़दूरी के लिए जाते हैं। विश्व में सबसे ज्यादा ईसाइयों के देश हैं।

क्या हम विदेश में भेदभाव पसंद करेंगे?

सवाल यह उठता है कि क्या उन ईसाई देशों में भारतीयों या हिंदुओं के साथ मारपीट, मोबलीचिंग या पक्षपात हम पसंद करेंगे? नहीं करेंगे। फिर हमारे देश में ऐसा करके क्यों देश की छवि खराब की जा रही है? भारत की घटनाओं को आधार बनाकर ऑस्ट्रेलिया में हिंदुओं के साथ घटनायें हुईं।

प्रभाव एवं आगे की राह

वर्तमान ग्लोबल एज का जमाना है। देश को आर्थिक, शैक्षणिक एवं तकनीकी रूप से समृद्ध बनाने के लिए ऐसी घटनाओं को रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। देश में मुसलमानों के साथ हिजाब को लेकर, मोबलीचिंग को लेकर, मस्जिदों की तोड़फोड़ को लेकर घटनायेँ हुई जो ठीक नहीं कहीं जा सकती हैं।

  • सरकार अपने स्तर पर कानून सम्मत कार्रवाई करे तो ठीक है।

  • लेकिन यदि धार्मिक संगठन कानून हाथ में लेकर घटना घटित करें तो ठीक नहीं माना जा सकता है।

इसलिए देश में धार्मिक उन्माद को रोका जाना चाहिए। यह किसी धर्म—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं बौद्ध—के लोगों में उन्माद हो या सामूहिक हो, अंततः नुकसान देश को ही होता है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।