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देश में आरएसएस की विचारधारा पर घमासान:

जयपुर

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कांग्रेस नेताओं में जुबानी जंग

वरिष्ठ नेताओं के बयान — क्या हुआ सीडब्लूसी में?

जयपुर/नई दिल्ली। कांग्रेस के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर सीडब्लूसी की बैठक में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस नेताओं के बीच जबरदस्त बहस छिड़ गई है।

क्यों दी गई आरएसएस से सीखने की नसीहत?

दिग्विजय सिंह ने आरएसएस संगठन और भाजपा की संगठनात्मक क्षमता, एकता और निर्णय लेने की क्षमता की तारीफ की और कांग्रेस को आरएसएस से सीख लेने की नसीहत दी। केरल से सांसद शशि थरूर ने भी कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए दिग्विजय सिंह के विचारों से सहमति जताई और कहा कि 140 वर्ष पुराने संगठन को मजबूत बनाने की जरूरत है।

विरोध के सुर: अलकायदा और गोडसे से तुलना

दूसरी तरफ कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने आरएसएस की तुलना आतंकी संगठन अलकायदा से कर दी। उन्होंने कहा कि भाजपा का वैचारिक मार्गदर्शन नफरत और आतंक फैलाता है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरएसएस को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की विचारधारा का संगठन बताया और कहा कि आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।

वैचारिक मतभेद

मणिक्कम टैगोर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की विचारधारा लोगों को जोड़ने की है, जबकि भाजपा का मार्गदर्शन नफरत फैलाता है। कुछ भी हो, कांग्रेस के भीतर दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर घमासान मचा हुआ है।

कांग्रेस में क्या चल रहा है: अंदरूनी हालात

कांग्रेस में तेजी से बदलाव हो रहा है। वर्तमान कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी की कांग्रेस मानी जा रही है। जो नेता सिर्फ बयानों और जोड़-तोड़ से राजनीति करके कांग्रेस पार्टी के उच्च पदों पर पहुंच गए, अब उनको बेचैनी होने लगी है। राहुल गांधी एक मेहनती, सक्रिय एवं संघर्षशील नेता हैं। जो नेता कांग्रेस में भाषणबाजी और जोड़-तोड़ की राजनीति करते थे, उनके लिए कांग्रेस में धीरे-धीरे पार्टी के दरवाजे बंद होने लगे हैं।

दिग्विजय सिंह के बयान के पीछे की राजनीति

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की तारीफ की, इसके पीछे उनका अपना स्वार्थ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें कांग्रेस में अपना भविष्य दिखाई नहीं दे रहा है।

क्या है डर और समीकरण?

दिग्विजय सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस की तारीफ अनायास ही नहीं कर रहे हैं, इसके पीछे उनकी सोची-समझी राजनीति है। कांग्रेस में काफी नेता ऐसे हैं जो सत्ता के साथ रहना चाहते हैं और सत्ता भाजपा के पास है। दूसरा, ऐसे नेताओं को जेल जाने से भी डर लगता है।

विचारधारा की लड़ाई

कांग्रेस को राहुल गांधी ने आरएसएस और उसकी विचारधारा के खिलाफ खड़ा किया है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस और आरएसएस की विचारधारा समान नहीं हो सकती। कांग्रेस सब वर्गों, जातियों और धर्म को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है, जबकि आरोप है कि आरएसएस और भाजपा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों से दूरी बनाकर रखती है।

कांग्रेस में ‘स्लीपर सेल’ कौन है?

कांग्रेस में कुछ विशेष जातियों के नेता हैं जिनकी विचारधारा आरएसएस से मेल खाती है। ऐसे नेता अपने वक्तव्यों से या तो कांग्रेस को नुकसान पहुंचाते रहते हैं या कमजोर बनाए रखते हैं।

  • कांग्रेस में रहते हुए भी ये नेता दूसरों के लिए काम करते हैं।

  • ऐसे नेता जोड़-तोड़ करके कांग्रेस सरकारों और संगठनों में उच्च पदों तक पहुंच जाते हैं।

प्रभाव एवं आगे की राह

कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी की नीतियों के कारण दलित, पिछड़े और आदिवासी तेजी से जुड़ते जा रहे हैं। भले ही कांग्रेस देश में विभिन्न चुनाव हार रही है, लेकिन जमीन पर कांग्रेस मजबूत भी हो रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस में कुछ नेता और बगावत कर सकते हैं, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी ज्यादा कमजोर नहीं हो सकती है।

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