पश्चिम बंगाल में बनेगी बाबरी मस्जिद
तृणमूल, भाजपा और कांग्रेस के पूर्व नेता ने रखी नींव
6 दिसंबर को रखी गई नींव — उमड़ी 2 लाख की भीड़
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडंगा में 6 दिसंबर 2025 को एक बड़ा प्रोग्राम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 2 लाख मुसलमानों की भीड़ जुटी। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की ओर से बाबरी मस्जिद के निर्माण की नींव रखने के लिए यह प्रोग्राम आयोजित किया गया।
90 करोड़ का प्रोजेक्ट और अयोध्या जैसी मस्जिद
बाबरी मस्जिद का निर्माण यहां करीब 20 बीघा जमीन पर किया जाएगा, साथ ही कॉलेज, हॉस्पिटल आदि का भी निर्माण करवाया जाएगा। मस्जिद निर्माण पर करीब 90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
बेलडंगा में बनने वाली मस्जिद उसी तरह की बनाई जाएगी, जिस तरह अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनी थी। गौरतलब है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को हिंदू संगठनों ने ढहा दिया था। टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद की याद में उसकी हूबहू कॉपी (प्रतिकृति) बेलडंगा में बनाना चाहते हैं।
प्रशासन और हाईकोर्ट का रुख
बाबरी मस्जिद के कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से करीब दो लाख लोग मस्जिद निर्माण के लिए हाथों में ईंट और बजरी लेकर पहुंचे। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने भी बाबरी मस्जिद निर्माण की अनुमति दी है। प्रोग्राम में सऊदी अरब से भी कुछ मौलानाओं ने शिरकत की।
कौन हैं हुमायूं कबीर?
हुमायूं कबीर आईपीएस अधिकारी रहे हैं। कबीर पश्चिम बंगाल पुलिस सर्विस में भर्ती हुए, फिर उन्हें आईपीएस में प्रमोशन मिला। राजनीति में आने के लिए उन्होंने वालेंटियर रिटायरमेंट (VRS) लिया था।
शुरुआत में उन्होंने कांग्रेस से रिश्ता जोड़ा, फिर भाजपा में (2018-2021) करीब 3 वर्ष रहे। 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन किया और उसी वर्ष वे डेबरा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। 10 मई 2021 को उन्हें राज्य मंत्री (State Minister) – ‘टेक्निकल एजुकेशन ट्रेनिंग एंड स्किल डेवलपमेंट’ बनाया गया, लेकिन अगस्त 2022 में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया।
राजनीतिक मायने और भविष्य के संकेत
निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के राजनीतिक सफर से जाना जा सकता है कि उनकी कोई निश्चित आईडियोलॉजी नहीं है। कांग्रेस, बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस और अब कोई और पार्टी हो सकती है। हुमायूं कबीर की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं बड़ी हैं। पश्चिम बंगाल में 35 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या है। राजनीति में बड़ा करने के लिए हुमायूं कबीर किसी भी पार्टी या व्यक्ति से हाथ मिला सकते हैं।
राजनीतिक संभावनाएं: AIMIM और भाजपा का एंगल?
हुमायूं कबीर अब टीएमसी से निलंबित विधायक हैं। उन्होंने कांग्रेस, बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस में रहकर राजनीति की है और वे एक पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं। उनको पता है कि देश में भावनाओं को उभार कर ही बड़ी राजनीति की जा सकती है। यदि कुछ बड़ा करने के लिए उन्हें भाजपा से छुपा हुआ या खुलकर समझौता करना पड़ा, तो वे कर लेंगे। अभी चर्चा है कि हुमायूं कबीर एआईएमआईएम (AIMIM) से समझौता करना चाहते हैं।
क्या है असली एजेंडा?
बाबरी मस्जिद की कॉपी पश्चिम बंगाल में बनाना उनकी धार्मिक सोच में राजनीतिक सोच ज्यादा दिखाई दे रही है। मुस्लिम बुद्धिजीवी इसके पीछे भाजपा का हाथ बता रहे हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को आसानी से नहीं हटाया जा सकता है, इसलिए भाजपा भी वहां ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। यदि ममता बनर्जी की सेकुलर राजनीति थोड़ी भी कमजोर पड़ती है, तो भाजपा और हुमायूं कबीर जैसे नेताओं की राजनीति चमक सकती है। इसलिए कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने के पीछे धार्मिक एजेंडा से ज्यादा राजनीतिक एजेंडा दिखाई दे रहा है। हुमायूं कबीर एक होशियार मुस्लिम नेता हैं और उन्होंने कुछ ही दिनों में पूरे देश में अपने आपको चर्चित चेहरा बनवा लिया है, जिसमें मीडिया भी सहयोग कर रहा है।
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