उम्मीद पोर्टल पर सभी वक़्फ़ संपत्तियां रजिस्टर्ड नहीं हो पाई! समय सीमा समाप्त
6 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन था अनिवार्य
वक़्फ़ बोर्ड में पहले से रजिस्टर्ड वक़्फ़ संपत्तियों को 6 दिसंबर 2025 तक केंद्र सरकार ने उम्मीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाना जरूरी किया था। लेकिन 6 दिसंबर अंतिम तारीख तक बड़ी संख्या में वक़्फ़ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन उम्मीद पोर्टल पर नहीं हो पाया है।
सुप्रीम कोर्ट और सरकार के निर्देश
केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने पहले ही देश की सभी वक़्फ़ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड करना अनिवार्य कर दिया था। लेकिन मुस्लिम समुदाय में हर काम देरी से करने की आदत के चलते उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ़ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अंतिम तारीख तक पूरा नहीं हो पाया।
देरी का कारण: अफवाहें और लापरवाही
पहले तो मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक लीडर्स और मजहबी लीडर्स ने ऐसा माहौल बनाया कि वक़्फ़ अमेंडमेंट बिल 2025 रद्द करवा दिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वक़्फ़ संपत्तियों के मुत्तवल्लि एक लंबे समय तक हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे कि वक़्फ़ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अंतिम समय में मची अफरा-तफरी
जब लगा कि किसी भी स्थिति में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा, तो फिर दिन-रात एक करके उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए टूट पड़े। एक साथ रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ने के कारण उम्मीद पोर्टल पर भी ट्रैफिक बढ़ गया और वक़्फ़ कमेटियों के जिम्मेदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर समय बढ़ाने की मांग की तो किसी ने मोदी सरकार से कुछ समय देने की प्रार्थना की, लेकिन वक़्फ़ कमेटियों को कहीं से भी कोई राहत नहीं मिली।
अब क्या है विकल्प?
मरते क्या न करते की कहावत को चरितार्थ करते हुए आखिरी 5-10 दिन में उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ़ संपत्तियां बड़ी संख्या में रजिस्टर्ड करवाई गईं। यदि वक़्फ़ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 6 महीने पहले ही कर दी जाती तो जो वक़्फ़ संपत्तियां बिना रजिस्ट्रेशन के रह गई हैं, वह नहीं रहतीं।
मंत्री किरण रिजूजू का बयान
केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरण रिजूजू ने अपने एक बयान में कहा कि अगले तीन महीने तक वक़्फ़ संपत्तियों के मुत्तवल्लियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। जो संपत्तियां तकनीकी कारणों से उम्मीद पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं हो पाई हैं, उनके लिए वक़्फ़ ट्रिब्यूनल कोर्ट से समय लिया जा सकता है।
ट्रिब्यूनल कोर्ट से मिल सकती है राहत
वक़्फ़ ट्रिब्यूनल कोर्ट के पास 6 महीने तक समय बढ़ाने का अधिकार है। मुस्लिम समुदाय एवं वक़्फ़ कमेटियों को अब स्पष्ट संदेश मिल गया है कि सभी वक़्फ़ संपत्तियों का उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। यदि कुछ संपत्तियां बिना रजिस्ट्रेशन के रह गई हैं तो वक़्फ़ बोर्ड कमेटियाँ वक़्फ़ ट्रिब्यूनल कोर्ट जाकर समय ले सकते हैं और बची हुई संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
समुदाय के लिए सबक
मुस्लिम समुदाय को इससे सबक लेने की जरूरत है कि वे सरकार के निर्देशों का शीघ्र पालन करने की जरूरत समझें। जब समय निकल जाता है या काम रह जाता है, तब ही हमें कुछ करने की रुचि बढ़ती है, जो ठीक नहीं कही जा सकती है।
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