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🇮🇳 कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची में सिर्फ चार मुस्लिम

जयपुर

🇮🇳 कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची में सिर्फ चार मुस्लिम

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जबकि कांग्रेस पार्टी मुस्लिमों के 100 प्रतिशत वोट हासिल करना चाहती है।

 

कांग्रेस संगठन में पहली बार ओबीसी, एसटी, एससी एवं अल्पसंख्यक समुदाय का बोलबाला

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान प्रदेश में अपने जिलाध्यक्षों के नामों की सूची जारी कर दी है।

जिलाध्यक्षों की सूची में शामिल नामों में ज्यादातर ओबीसी, एसटी, एससी एवं अल्पसंख्यक वर्ग से शामिल किए गए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची में पहली बार ब्राह्मण, वैश्य एवं राजपूत जाति के कार्यकर्ता काफी कम संख्या में शामिल किए गए हैं।

सूची के नामों का विश्लेषण किया जाए तो लगता है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विचारों की कांग्रेस नजर आने लगी है। कांग्रेस का वोट बैंक दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग है। जब तक दलित, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस से जुड़ा है कांग्रेस मजबूती की ओर बढ़ती जाएगी।

ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य वर्ग को कम जगह मिली

देश में ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत वर्ग ज्यादातर भाजपा के साथ जुड़ गया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी के संगठन में भी इन उच्च वर्ग के लोगों का बोलबाला रहता आया है। यह पहली बार है कि कांग्रेस के संगठन में बहुत कम संख्या में ब्राह्मण, वैश्य एवं राजपूत जाति के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।

ऐसा भी माना जा रहा है कि कांग्रेस भी भाजपा के पदचिन्हों पर चलने लगी है। भाजपा अल्पसंख्यकों को तरजीह नहीं देती है और अल्पसंख्यक वर्ग भी भाजपा को वोट नहीं देता है। इसी तरह ब्राह्मण, वैश्य और राजपूतों का जुड़ाव भाजपा के साथ है। यही कारण है कि कांग्रेस इन वर्गों से दूरी बनाती जा रही है।

जिलाध्यक्षों की सूची में सिर्फ चार मुस्लिम

45 जिलाध्यक्षों की सूची में सिर्फ चार जिलाध्यक्ष मुस्लिम वर्ग से बनाए गए हैं। जिनमें:

  • डीडवाना, कुचामन से मकराना विधायक जाकिर गैसावत

  • जैसलमेर से अमरदीन फकीर

  • फलौदी से मोहम्मद सलीम नागौरी

  • टोंक से सैयद सऊद सईदी

कांग्रेस पार्टी के पास मुस्लिम वर्ग एकमात्र ऐसा वर्ग है जो 90 प्रतिशत से ज्यादा वोट कांग्रेस पार्टी को देता है। फिर भी कांग्रेस पार्टी ने 50 में से सिर्फ चार मुस्लिम वर्ग के ज़िलाध्य्क्ष बनाए हैं। कांग्रेस का मुसलमानों के साथ ऐसा व्यवहार प्रदेश के मुसलमानों को पसंद नहीं आ रहा है।

मुस्लिम कार्यकर्ताओं की भावना

कांग्रेस में मुस्लिम वर्ग के कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुस्लिम कार्यकर्ता कब तक पार्टी प्रोग्राम में दरी एवं कुर्सी बिछाता रहेगा। जबकि पार्टी उनको सिर्फ वोट बैंक से ज्यादा नहीं समझती है। कांग्रेस पार्टी के जितने भी बड़े नेता हैं सब के सब मुस्लिम वोटरों के सहारे जीतकर आते हैं। जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आदि शामिल हैं।

जयपुर में अल्पसंख्यक और दलित वर्ग का बन सकता अध्यक्ष

जयपुर शहर अध्यक्ष की घोषणा कांग्रेस पार्टी ने रोक ली है। जयपुर शहर में कांग्रेस पार्टी पहली बार गहराई से सोच रही है कि जयपुर शहर अध्यक्ष किसी ऐसे कार्यकर्ता को बनाया जाए जो अपने वर्ग के वोट कांग्रेस को दिला सके।

जयपुर शहर अध्यक्ष पद पर पहले ब्राह्मण, राजपूत और अल्पसंख्यक वर्ग के अध्यक्ष रहे हैं। इनमें से राजपूत और ब्राह्मण समाज के लोग भाजपा से जुड़ने के कारण कांग्रेस को राजपूत और ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष बनाने का फायदा नहीं मिल पाता है। अल्पसंख्यक वर्ग पहले से ही कांग्रेस के साथ जुड़ा हुआ है।

दलित अध्यक्ष क्यों फायदेमंद?

इसलिए कांग्रेस पार्टी पहली बार विचार कर सकती है कि दलित समाज का जिला अध्यक्ष उसके लिए कितना फायदेमंद हो सकता है। जयपुर शहर में बड़ी संख्या में दलित वर्ग के लोग रहते हैं। दलितों में अब राजनीति के प्रति जागरूकता देखी जा रही है। दलित वर्ग सत्ता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। दौसा विधानसभा उपचुनाव में दलित वर्ग के कांग्रेस के कार्यकर्ता ने भाजपा उम्मीदवार को आसानी से हराया था। इसी तरह जयपुर में यदि दलित वर्ग का कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनाया जाता है तो पार्टी को फायदा होने की ज़्यादा संभावना है, ऐसा काफी काँग्रेसी कार्यकर्ताओं का मानना है।

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