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हिन्दू राष्ट्र के नाम पर मुसलमान निशाने पर क्यों ?

जयपुर

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संघ देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है

संघ देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है। लेकिन इसके बहाने लगातार मुसलमानों को निशाने पर रखा जाता है और अदालतें खामोश हैं। आखिर कब तक! इस खामोशी पर हैरानी होती है कि क्या देश में संविधान खत्म हो गया है? क्या सुप्रीम कोर्ट ने सच देखना बंद कर दिया है? या अब देश के मुसलमानों के नागरिक अधिकारों की रक्षा करने में देश का संविधान और देश का सुप्रीम कोर्ट नाकाम हो गया है!

संघ की वैधता और मोहन भागवत का बयान

हैरानी होती है कि संघ एक ऐसा संगठन है जिसका देश के किसी भी कानून में पंजीयन नहीं है। वह संगठन तय कर रहा है कि देश कैसे चलेगा। संघ के प्रमुख मोहन भागवत असम जाकर कह रहे हैं कि यदि मुसलमान और ईसाई देश की पूजा करना शुरू कर दें तो फिर वे भी हिंदू हैं और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं होगी।

सवाल: आपको अधिकार किसने दिया?

सवाल यह है कि भागवतजी आपको यह अधिकार किसने दिया कि आप निर्देश जारी करें कि ईसाइयों और मुसलमानों को क्या करना है? देश का संविधान उन्हें अपने धर्म को मानने, उसका प्रचार-प्रसार करने की इजाजत देता है। हैरानी तब होती है कि संघ के लोग सुप्रीम कोर्ट में कहते हैं कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, बल्कि जीवन शैली है और बाहर आकर हिंदू राष्ट्र का अलाप करते हैं।

हिंदू शब्द की उत्पत्ति

भागवतजी शायद जानते ना हों कि हिंदू एक विदेशी शब्द है और यह सिंधु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल हुआ था, न कि धर्म के लिए। अब इसे आप धर्म मानने लग जाएं तो यह आपकी अपनी सोच है। लेकिन सवाल यह उठता है कि देश के प्रधानमंत्री से लेकर हर पोस्ट पर हिंदू मौजूद है, फिर भी हिंदू राष्ट्र के बहाने देश के मुसलमानों के खिलाफ नफरत क्यों फैलाई जाती है, जो हमेशा जारी रहती है?

नफरत फैलाने की घटनाएं

मुसलमानों से नफरत का आलम यह है कि पिछले दिनों कुछ मुस्लिम परिवार पूणे के शनिवाड़ा किले में घूमने चले गए, जो पुरातत्व विभाग से संरक्षित है। वहां कुछ महिलाओं ने नमाज अदा कर ली। इस पर पुरातत्व विभाग को कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन भाजपा की एक राज्य सभा सांसद मेघा कुलकर्णी की धार्मिक भावनाएं आहत हो गईं और उन्होंने एफआईआर दर्ज करने के लिए पूरे महाराष्ट्र में बवाल खड़ा कर दिया।

अतिक्रमण और दोहरे मापदंड

लेकिन मेघा कुलकर्णी को यह कभी नजर नहीं आया कि देश के ज्यादातर पार्कों में बिना अनुमति के संघ की शाखाएं लगती हैं। इतना ही नहीं देश के ज्यादातर पुलिस थानों की ज़मीनें, सिंचाई विभाग के कार्यालय, यहां तक कि अस्पतालों की ज़मीनों पर अतिक्रमण करके मंदिर बना रखे हैं। यह उनको नजर नहीं आया। इतना ही नहीं दीपावली पर संघ के कुछ लोग दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन की दरगाह पर दीवोत्सव मनाने चले गए। अरे भाई! तुम अपने मंदिरों पर खूब दीप जलाओ किसी को कहां एतराज़ है। लेकिन क्यों मुसलमानों की आस्था की जगहों पर जाकर हंगामा खड़ा करते हैं।

मंत्री रघुनाथ सिंह का विवादित बयान

मुसलमानों से नफरत का आलम यह है कि यूपी सरकार का एक मंत्री रघुनाथ सिंह खुलेआम सार्वजनिक रूप से बयान दे रहा है कि देश की सभी मस्जिदों पर ताले लगा देना चाहिए, मदरसों को बंद कर देना चाहिए और बुलडोजर चला देना चाहिए। इतना ही नहीं देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को आतंकवाद का अड्डा बता रहा है।

अजीत डोभाल का बयान और रघुनाथ सिंह को जवाब

जबकि इन्हीं मंत्री जी की केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सार्वजनिक रूप से ऐलान कर रहे हैं कि देश आजाद होने के बाद से पाकिस्तान की आईएसआई भारत में जासूसी करने के लिए अस्सी फ़ीसदी हिंदुओं की भर्ती करती है और वह आंकड़े बताते हुए कहते हैं कि अब तक लगभग 5 हज़ार जासूसी के मामलों में पकड़े गए लोगों में अस्सी फ़ीसदी हिंदू हैं। ऐसे में मंत्री रघुनाथ सिंह को मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने और अलीगढ़ विश्वविद्यालय को आतंकवाद का अड्डा बताने से पहले अजीत डोभाल का बयान सुन लेना चाहिए था।

उत्तर प्रदेश में नफरत का माहौल

यू पी तो मुसलमानों के खिलाफ नफरत फ़ैलाने में सबसे आगे रहता है। कुछ सालों पहले गौ मांस के रखने के नाम पर एक मुस्लिम अख़लाक की हत्या कर दी गई थी। लेकिन अब यू पी सरकार ने कोर्ट में कहा है कि जिन्हें आरोपी बनाया है उनके खिलाफ हत्या में शामिल होने के सबूत नहीं हैं, यानि अखलाक की हत्या ही नहीं हुई। लेकिन यू पी के मुख्यमंत्री कुछ भी कर सकते हैं। जो मुख्यमंत्री अपने खिलाफ चल रहे सारे मुकदमों को वापस ले सकता है तो इसको अख़लाक के हत्यारे कैसे नजर आ सकते हैं और हैरानी यह है कि यह सब कुछ हो रहा है अदालतें खामोश हैं, सुप्रीम कोर्ट खामोश है।

नफरत की वजह क्या है? संघ का इतिहास

ऐसे में सवाल यह उठता है कि मुसलमानों से इतनी नफरत की वजह क्या है तो इसके लिए संघ के इतिहास में झांकना होगा। संघ के दूसरे संघ सरचालक गुरु गोलवलकर ने एक किताब लिखी थी “बंच ऑफ थॉट”। उसमें उन्होंने जिस हिंदू राष्ट्र की कल्पना की थी, उसमें उन्होंने तीन बाधाओं का जिक्र किया था:

  1. वामपंथी

  2. ईसाई

  3. मुसलमान

उनका मानना था कि इन तीन बाधाओं को अगर खत्म कर दिया जाए तो देश को आसानी से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जा सकता है।

बाधाओं को खत्म करने का क्रम

  • सबसे पहले वामपंथियों को निशाने पर लिया: जिनकी सरकारें केरल, बंगाल और त्रिपुरा तक थीं और पूरे देश के वामपंथी विचारक मौजूद थे। लेकिन संघ के प्रयासों से अब वामपंथी लगभग खत्म से हो गए हैं।

  • फिर आए ईसाई निशाने पर: इसके लिए उन पर धर्मांतरण के आरोप लगाकर चर्चों पर हमले किए गए और गत वर्षों में मणिपुर में जो हुआ और पूरे देश ने देखा कि कैसे ईसाइयों को निशाना बनाया गया और इन सब से ईसाई समुदाय लगभग समर्पण की स्थिति में आ गया है।

  • अब बचे मुसलमान: ये संघ के गठन से ही उसके निशाने पर रहे हैं। लेकिन केंद्र में सत्ता के आने के बाद उसको उनका लगातार निशाने पर रखा जा रहा है। कभी लव जिहाद, तो कभी तीन तलाक, कभी वक्फ़ कानून।

बाबा धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा पर सवाल

लेकिन इतना सब के बाद भी अभी मुसलमान वैसे खौफ में नहीं आ रहा है जैसा ये चाहते हैं। लेकिन इनके हौंसले बहुत बुलंद हैं, एक बाबा धीरेंद्र शास्त्री तो देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाने के लिए यात्रा निकाल रहा है। संविधान और देश के कानून के हिसाब से यह यात्रा सीधे-सीधे देश के संविधान को चुनौती देने वाली है और बाबा पर देशद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए। लेकिन बाबा की यह यात्रा पूरे प्रोटोकॉल के साथ पुलिस संरक्षण में चल रही है और देश के संविधान की रक्षा करने की शपथ लेने वाली सरकार चुप है। देश का सुप्रीम कोर्ट चुप है।

हिंदू राष्ट्र का राग जारी क्यों?

सवाल यह है कि धीरेंद्र शास्त्री को यात्रा निकालने की आवश्यकता क्यों है? केंद्र में सरकार हिंदूवादी है तो बाबा उसे सरकार से देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करवा दे। लेकिन एक बार घोषित हो गया तो फिर मुसलमानों के खिलाफ जो नफरत फैलाने का अभियान है, उसका क्या होगा? उसे तो फिर चलना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए मुसलमानों के खिलाफ नफरत का अभियान चलाने के लिए हिंदू राष्ट्र का राग जारी रखने की जरूरत है।

लेकिन इन लोगों को शायद मुसलमानों के डीएनए की समझ नहीं है। वे देश के संविधान और लोकतंत्र पर पूरा भरोसा रखते हैं और वह किसी से नहीं डरते हैं और यात्रा करने वाले कितनी ही नफरत फैलाएं मुसलमानों का देश के संविधान, इस देश के हिंदू मुस्लिम भाईचारे पर यकीन बरकरार था और हमेशा रहेगा।

-डॉ. शहाबुद्दीन खान

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