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प्रमोद जैन भाया ने दो वर्ष बाद फिर जीती अंता सीट

जयपुर

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-भाजपा के सुमन मोर और निर्दलीय नरेश मीणा से था मुकाबला

-सुमन मोर की हार से भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री को लगा बड़ा झटका

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की अंता विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया विजयी रहे। प्रमोद जैन भाया ने अंता विधानसभा सीट करीब 15 हजार मतों से जीती। प्रमोद जैन भाया 2023 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा के कमल मीणा से चुनाव हार गए थे। हाईकोर्ट की ओर से विधायक कमल मीणा की विधानसभा सदस्यता रदद होने के बाद अंता विधानसभा का चुनाव चुनाव आयोग को फिर से करवाना पड़ा। प्रमोद जैन भाया ने यह सीट मात्र दो वर्ष से कम समय में ही फिर से जीत ली। प्रमोद जैन भाया का जीतना उनके और कोंग्रेस पार्टी दोनों के लिए सुखद है।

सुमन मोर की हार से भाजपा को झटका

अंता विधानसभा चुनाव झालावाड़ संसदीय क्षेत्र में आता है जहां पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे का वर्चस्व माना जाता है। भाजपा उम्मीदवार सुमन मोर को पूर्व मुख्यमंत्री राजे की सलाह पर ही उम्मीदवार बनाया गया था। भाजपा उम्मीदवार की 15 हजार वोटों से हार, वह भी भाजपा शासन में पार्टी के लिए और पूर्व मुख्यमंती राजे के लिए बड़ा झटका है। वैसे माना जाता है कि हाड़ौती के एक भाजपा गुट ने भाजपा उम्मीदवार को हराने और कोंग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया को जिताने के लिए अंदरूनी रूप से कार्य किया था। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा ने इस तरह के आरोप अपने भाषणों में भाजपा नेताओं पर लगाए हैं।

नरेश मीणा हार कर भी उभरे-

निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा तीसरे नम्बर आने के बावजूद अंता और हाड़ौती के लोगों में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। नरेश मीणा के भाजपा उम्मीदवार से कुछ 100 ही वोट कम आए हैं। लेकिन उनके चुनाव लड़ने के प्रयास और संघर्ष को लोगों ने काफी सराहना की है। नरेश मीणा के साथ युवाओं की एक बड़ी टीम है। जिस तरह नरेश मीणा को अंता के लोगों का समर्थन मिला है, उससे लगता है कि नरेश मीणा प्रदेश के बड़े नेता बन सकते हैं। नरेश मीणा ने चुनाव में केवल मीणा समाज के वोट ही नही लिए, बल्कि करीब-करीब सभी समाजों के वोट हासिल किए। नरेश मीणा को छोटे दलों और नेताओं का पूरा समर्थन मिला जिनमें सांसद हनुमान बेनीवाल, पूर्व मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा, संसद संजय सिंह, एसडीपीआई पार्टी आदि। नरेश मीणा एक संघर्षशील लीडर की छवि बना चुके हैं। आगामी चुनावों में इस छवि का उनको फायदा मिल सकता है।

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