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मुस्लिम मतदाता निर्णायक होंगे बिहार चुनाव में

जयपुर

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18 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता यदि बटता है तो एनडीए की, नहीं बटा तो इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी बिहार प्रदेश में

  • एआईएमआईएम की 5-10 विधानसभा सीट जीतने की संभावना

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। बिहार विधानसभा का दूसरा चरण 11 नवंबर को संपन्न हो जाएंगे। बिहार में इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है। 14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

एम-वाई (MY) समीकरण और बंटवारा

ज्यादातर सर्वेक्षणों में एनडीए यानी भाजपा-नीतीश गठबंधन की सरकार बनती दिखाई दे रही है। इंडिया गठबंधन एक बार फिर बिहार की सत्ता से वंचित रह सकता है। इसका मुख्य कारण है कि इंडिया गठबंधन का कोर वोटर एम वाई (मुस्लिम-यादव) बटता नजर आ रहा है।

  • यदि एम वाई समीकरण मजबूत बना रहा तो सभी समीकरण झूठे साबित हो सकते हैं।
  • बिहार में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की करीब 35 प्रतिशत जनसंख्या है।
  • बिहार का मुस्लिम वर्ग इंडिया गठबंधन, एआईएमआईएम पार्टी एवं जन स्वराज पार्टी में बटता नजर आ रहा है।
  • मुस्लिम वोटरों का बंटवारा सीधे तौर पर भाजपा गठबंधन को फायदा पहुंचा रहा है।

जन स्वराज पार्टी को मुस्लिम युवाओं का कुछ संख्या में समर्थन मिल रहा है। बिहार विधानसभा की स्थिति को देखते हुए लगता है की जन स्वराज पार्टी को यदि मुस्लिम वर्ग का समर्थन मिलना भी इंडिया गठबंधन को बड़ा नुकसान माना जाएगा। मुस्लिम वर्ग कितना बटता है और कितना मजबूत रहता है, इसकी पूरी जानकारी 14 नवंबर को विधानसभा चुनाव परिणाम के दिन मिल जाएगी।

एआईएमआईएम को मिल सकती है 5-10 विधानसभा सीट

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार सरकार बनने का दारोमदार मुस्लिम वोटरों पर निर्भर है। मुस्लिम वोटर और मुस्लिम वर्ग कितना जागरूक हुआ है, इसकी झलक बिहार विधानसभा में मिलने वाली है।

  • सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बिहार के करीब 24 मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर चुनावी मैदान में है। इन सीटों पर मुसलमानों की संख्या 30 से 70 प्रतिशत तक है।
  • ओवैसी ने अपना चुनाव प्रचार इन्हीं सीटों तक सीमित रखा है।
  • इंडिया गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान ओवैसी की पार्टी से होने वाला है, क्योंकि एआईएमआईएम का मुख्य मुकाबला कांग्रेस और राजद उम्मीदवारों से हैं। जिसका सीधा फायदा भाजपा गठबंधन को होगा।

देशभर के मुस्लिम नेताओं का प्रयास

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी एवं राजद के देशभर के मुस्लिम नेता ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए बिहार जाकर जोर लगा रहे हैं।

  • देशभर के मुस्लिम राजनेता ओवैसी को अपने राजनीतिक करियर के लिए खतरा मानते हैं
  • यही कारण है कि मुस्लिम नेता बिहार जाकर ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवारों को हराने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि यदि ओवैसी की पार्टी बिहार में मजबूत होती है तो देश के मुस्लिम लीडरों को राजनीति करना मुश्किल हो सकता है।
  • इसलिए मुस्लिम लीडरों की इच्छा हो सकती है कि ओवैसी के उम्मीदवार नहीं जीते, चाहे भाजपा उम्मीदवार जीत जाएं

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