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एक रहस्यवादी कवि थे सूफी फरीदुद्दीन अत्तार

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12वीं सदी के दौर में इस्लामिक जगत के महानतम सूफी

12वीं सदी के दौर में इस्लामिक जगत के महानतम सूफियों में फ़रीदुद्दीन अत्तार प्रमुख थे।

  • असली नाम: अबू हमीद इब्न अबू बक्र इब्राहीम।
  • जन्म: सन् 1145-1146 ई. में निशापुर, (ईरान) में।
  • मृत्यु: सन् 1221 ई. में (74-75 वर्ष की आयु में) चंगेज़ खाँ के फ़ारस पर आक्रमण के समय एक सैनिक के हाथों हुई।
  • क़ब्र: निशापुर, (ईरान) में है।

आरंभिक जीवन और पेशे से विरक्ति

अत्तार के पिता का नाम इब्राहीम बिन इसहाक़ था, जो इत्र और दवाइयों का कारोबार करते थे। पिता के देहांत के बाद फ़रीदुद्दीन अत्तार ने यह काम संभाला।

  • पेशे: वह एक आधुनिक शहर के डॉक्टर और फार्मासिस्ट के समान थे और लोगों को चिकित्सा सेवा देते थे, इसके साथ ही सूफ़ी विचारधारा को भी बढ़ावा देते थे।

विरक्ति की घटना

उनकी विरक्ति के सम्बन्ध में एक प्रसिद्ध घटना है, जिसका उल्लेख मौलाना शिब्ली ने ‘शेर-उल-अ’जम’ में किया है:

  • एक बार अत्तार अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी एक फ़क़ीर आया और उनकी ठाट-बाट देखने लगा।
  • अत्तार के झल्लाने पर फ़क़ीर ने कहा, “तुम अपनी चिंता करो! मेरा जाना कौन सा कठिन कार्य है? लो! मैं चला!” यह कहकर वह वहीं लेट गया और उसके प्राण निकल चुके थे
  • इस घटना से अत्तार के हृदय में विरक्ति की लौ लगी। उन्होंने खड़े-खड़े अपनी दुकान लुटवा दी और फ़क़ीर बन गए

व्यापक यात्राएँ

उन्होंने अपना फार्मेसी स्टोर छोड़कर व्यापक रूप से यात्राएँ कीं। वे बगदाद, बसरा, कूफ़ा, मक्का, मदीना, दमिश्क, ख़्वारिज़्म, तुर्किस्तान और भारत जैसे स्थानों की यात्रा की और सूफ़ी शायख़ से मिलकर सूफ़ी विचारों को बढ़ावा देते हुए वापस लौटे।

साहित्यिक और दार्शनिक योगदान

अत्तार ने सूफ़ी शायख़ रुक्नुद्दीन को अपना मुर्शिद बनाया और सूफ़ियाना कविताएँ और दर्शनात्मक ग्रंथ लिखे।

  • प्रसिद्ध रचनाएँ: “मंतीक अल-तायर” (पक्षियों की सभा) और “इलाही-नामा” प्रमुख हैं।
  • गद्य कार्य: उन्होंने धार्मिक संतों और सूफियों की जीवनी संकलित कर “तज़्किरातुल-औलिया” नामक ग्रंथ लिखा, जो उनका एकमात्र ज्ञात गद्य कार्य है। इसमें मंसूर अल-हलाज के वध की कहानी सबसे सम्मोहक मानी जाती है।
  • काव्य शैली: उनकी रचनाओं में चतुष्पदियों, चतुर्दशपदियों और द्विपदियों की अधिकता है। कहा जाता है, इन्होंने एक लाख बीस हजार पद (Couplets) लिखे।
  • उनके काव्य में काव्य, अध्यात्म और दर्शन (सूफ़ी) का उच्च कोटि का समन्वय मिलता है। शैली सरल, सुबोध, मधुर एवं स्पष्ट थी।

अन्य प्रमुख रचनाएँ

  • इलाही-नामा (6500 छंदों का काव्य)
  • मुख्तार-नामा (रहस्यमय और धार्मिक विषयों का सुसंगत समूह)
  • दीवान-ए-अत्तार (ग़ज़ल और क़सीदा)
  • असरार-नामा
  • मुसीबत नामा
  • जवाहिर-नामा
  • शरह अल-क़ल्ब

‘मंतिक अल-तयूर’ में आध्यात्मिकता के सात चरण

अत्तार की सबसे प्रसिद्ध रचना ‘मंतिक अल तयूर’ में पक्षियों के सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिकता के सात चरणों का वर्णन किया गया है:

  1. खोज की घाटी (वादी ए तलब)
  2. प्रेम और स्नेह की घाटी (वादी ए इश्क़)
  3. बुद्धिमता की घाटी (वादी ए हैरत)
  4. त्याग की घाटी (वादी ए स्तग़ना)
  5. एकत्व की घाटी (वादी ए तौहीद)
  6. विस्मय की घाटी (वादी ए फ़िक्र व फ़ना)
  7. अंतर्ज्ञान की घाटी (वादी ए मारिफ़त)

रूमी पर अत्तार का प्रभाव

फ़रीदुद्दीन अत्तार ईरान के सबसे प्रसिद्ध रहस्यवादी कवियों में से एक हैं। उनकी रचनाएँ रूमी और कई अन्य रहस्यवादी कवियों की प्रेरणा थीं। रूमी ने अत्तार की प्रशंसा इस प्रकार की है:

“अत्तार इश्क़ के सात शहरों से गुज़रा है, जबकि हमने पहली गली को मुश्किल से पार किया है।”

अत्तार के प्रसिद्ध कथन

  • “मृत्यु ने न तो मूर्ख को छोड़ा और न बुद्धिमान को उसके लिए भले और बुरे समान हैं।”
  • “प्रेम का एक कण भी सारे संसार से बढ़कर मूल्य रखता है और तनिक सी पीड़ा संपूर्ण संसार के प्रेमियों से बढ़कर बात है।”

अत्तार की रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है और वे फ़ारसी कवियों में से हैं जिनकी कृतियों को इटली में भी खूब सराहा गया है।

(फ़ज़लुर्रहमान द्वारा)

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