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अबू अली सीना

जयपुर

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एक वक्त था जब दुनियां में मुसलमानों का बोलबाला था उस दौर में मुसलमानों ने नई-नई तहकीकात की और दुनिया के मौजूदा  उलूम में नए उसूलों का चलन बढ़ाया ऐसे ही एक मुस्लिम शख्सियत जिन्होंने अपने उलूम और तहकीकात की रोशनी यूरोप तक फैलाई ,उनके बारे में चंद मालूमात पेश है। इब्न सीना का पूरा नाम अबू अली अल-हुसैन इब्न अब्द अल्लाह इब्न सिना है। यूरोप में लैटिन भाषा में इनका नाम “एविसेना” है और युरोप में इसी नाम से वे जाने जाते हैं।

इब्न सीना का  जन्म लगभग 980 ई में  बुखारा के पास एक गाँव अफशाना, ईरान में हुआ था  [अब उज़्बेकिस्तान में] और मृत्यु सन् 1037 ई में, हमादान, ईरान में  एक यात्रा के दौरान ही पेट दर्द से  हो गई।   उनके पिता, जो संभवतः इस्माइली थे, एक स्थानीय समानी (साम्राज्य के) गवर्नर थे, उनकी माता का नाम सितारा था और  वह बुखारा से थीं । कम उम्र में ही उनका परिवार बुखारा आ गया जहाँ उन्होंने इस्माइल ज़ाहिद  से हनफ़ी न्यायशास्त्र ( फ़िक़्ह ) की तालीम हासिल की । इब्न सीना ने 10 वर्ष की अल्पायु में ही संपूर्ण कुरान पढ़ और याद कर लिया था यानी हाफ़िज़ क़ुरान हो गये थे।  कई शिक्षकों से  चिकित्साशास्त्र का अध्ययन किया, और  18 वर्ष की आयु तक सभी विज्ञानों में महारत हासिल कर ली थी‌। इब्न सीना ने इस्लामी स्वर्ण युग कहे जाने वाले दौर में लेखन का एक विशाल संग्रह बनाया, जिसमें बाइज़ेंटाइन यूनानी-रोमन, फारसी और भारतीय ग्रंथों के अनुवादों का बड़े पैमाने पर अध्ययन किया और लगभग 450 पुस्तकें लिखी , जिनमें से 200 से  240 के लगभग पुस्तकें अब भी उपलब्ध है। इब्न सीना, केवल चिकित्सकों और दार्शनिकों में सबसे आगे नहीं थे बल्कि पश्चिम में शताब्दियों तक वे चिकित्सकों के सरदार के रूप में प्रसिद्ध रहे।  इब्न सीना के दर्शनशास्त्र और चिकित्सा के अलावा,  खगोल विज्ञान, कीमियागरी, भूगोल और भूविज्ञान, मनोविज्ञान, इस्लामी धर्मशास्त्र, तर्कशास्त्र, गणित, भौतिकी और कविता पर लेखन शामिल है।। नूह इब्न मंसूर (शासनकाल 976-997) के समानी दरबार में इब्न सीना ने  एक चिकित्सक के रूप में सेवा में प्रवेश किया। इब्न सीना  ने वर्तमान ईरान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के कुछ हिस्सों में विभिन्न राजवंशीय शासकों के दरबारी चिकित्सक, राजनीतिक सलाहकार और प्रशासक के रूप में भी कार्य किया। इब्न सीना ने  बुखारा में अपनी दो प्रारंभिक रचनाएँ लिखीं। पहली,  मक़ाला फ़ि’ल-नफ़्स, यह पुस्तक समानी शासक को समर्पित एक संक्षिप्त ग्रंथ है जो  बुद्धि की अमूर्तता को स्थापित करता है।  दूसरी, तत्वमीमांसा पर उनकी पहली प्रमुख रचना, ” प्रोसोडिस्ट के लिए दर्शन” (अल-हिक्मा अल-अरुदिया) थी। बाद में उन्होंने दर्शनशास्त्र के तीन ‘विश्वकोश’ लिखे। इनमें से पहला अल-शिफा (इलाज) है,  हालांकि  इसके कुछ हिस्से एक सैन्य अभियान में खो गए।  अन्य दो विश्वकोश बाद में  इस्फ़हान में लिखे गए थे। पहला, अरबी के बजाय फ़ारसी में है जिसका शीर्षक दानिशनामा-  दूसरी रचना  अल-इशारत वल-तन्बीहात है। इस्लामी विज्ञान (उलूम) में, उन्होंने चुनिंदा कुरान की आयतों और अध्यायों पर लघु टिप्पणियों की एक श्रृंखला लिखी है। उन्होंने कुछ साहित्यिक रूपक भी लिखे हैं , जिनके दार्शनिक महत्व को लेकर 20 वीं और 21वीं सदी के विद्वानों में तीखी असहमति भी रही है।   इब्न सीना  की लिखित पुस्तक  द ईस्टर्नस (अल-मशरिकियुन) या द ईस्टर्न फिलॉसफी (अल-हिक्मा अल-मशरिकिया), जिसे उन्होंने 1020 के दशक के अंत में लिखा था और जिसका अधिकांश भाग लुप्त हो गया है। इस में उन्होंने बताया कि सच्चा ज्ञान आन्तरिक प्रकाश से आता है अर्थात बुद्धी  और अन्तर्ज्ञान को ज्ञान का स्त्रोत माना है।

इब्न सीना  ने तर्कशास्त्र को दर्शनशास्त्र का एक सहायक, एक कला और विज्ञान माना । एक    महत्वपूर्ण बात यह  है कि उनके धर्मशास्त्र—प्रथम कारण और दस बुद्धि—ने उनके दर्शन को, सृष्टिकर्ता के रूप में ईश्वर के प्रति समर्पण और आकाशीय पदानुक्रम के साथ , मध्ययुगीन यूरोपीय दर्शन में आसानी से आयातित(विचारों को आपस में मिलान होने दिया) होने दिया। कई चिकित्सकों ने ऐतिहासिक रूप से इब्न सीना  को उनकी संगठनशीलता और स्पष्टता के लिए प्राथमिकता दी। वास्तव में, यूरोप के महान चिकित्सा विद्यालयों पर उनका प्रभाव प्रारंभिक आधुनिक काल तक फैला रहा। चिकित्सा के  क्षेत्र में  इब्न सीना  की  किताब कैनन ( अल-क़ानून फ़ी अल-तिब्ब ) प्रमुख स्रोत बन गयी । यह पुस्तक  पाँच पुस्तकों में विभाजित है। पहली पुस्तक में चार ग्रंथ हैं, जिनमें से पहला पेरगाम के यूनानी चिकित्सक गैलेन के चार द्रव्यों (रक्त, कफ, पीत पित्त और काला पित्त) के आलोक में चार तत्वों (पृथ्वी, वायु, अग्नि और जल) की जाँच करता है। पहले ग्रंथ में शरीर रचना विज्ञान भी शामिल है। दूसरा ग्रंथ एटियलजि (किसी बीमारी, विकार या स्थिति के कारणों और उत्पत्ति के अध्ययन को कहते हैं) और लक्षणों की जाँच करता है, जबकि तीसरा स्वच्छता, स्वास्थ्य और बीमारी, और मृत्यु की अनिवार्यता को कवर करता है। चौथा ग्रंथ एक चिकित्सीय नोसोलॉजी (रोग का वर्गीकरण) और आहार- विधि व उपचारों का एक सामान्य अवलोकन है। कैनन की दूसरी पुस्तक “मटेरिया मेडिका” है, तीसरी पुस्तक “सिर से पैर तक के रोगों” को कवर करती है, चौथी पुस्तक “कुछ अंगों से संबंधित नहीं होने वाली बीमारियों” (बुखार और अन्य प्रणालीगत और हास्य संबंधी विकृतियाँ) की जाँच करती है, और पाँचवीं पुस्तक “मिश्रित औषधियाँ” (जैसे, थेरियाक्स, मिथ्रिडेट्स, इलेक्टुअरी और रेचक) प्रस्तुत करती है। दूसरी और पाँचवीं पुस्तकों में लगभग 760 सरल और मिश्रित औषधियों का महत्वपूर्ण संग्रह है जो गैलेन के विकृति विज्ञान पर विस्तार से प्रकाश डालता है।  उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तकें ‘द बुक ऑफ़ हीलिंग’, द फिलॉसॉफिकल एंड साइंटिफिक इनसाइक्लोपीडिया और ‘द कैनन ऑफ़ मेडिसिन’ हैं, जिन्हें मेडिकल इनसाइक्लोपीडिया भी कहा जाता है।

इब्न सीना इस्लामी स्वर्ण युग के सबसे प्रमुख चिकित्सकों, खगोलविदों, विचारकों और लेखकों में से एक रहे हैं और उन्हें आधुनिक  चिकित्सा के जनक के रुप में भी जाना जाता है। इब्न सीना ने दुनिया में आधुनिक चिकित्सा के साथ साथ अन्य उलूम में भी बहुत काम किया जिसके लिए आज भी उनका नाम ज़िन्दा है।

-फ़ज़लुर्रहमान

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