जानिए कौन थे गणितज्ञ और खगोल शास्त्री हसन इब्न अल-हयथम
अबू अली अल-हसन इब्न अल-हसन इब्न अल-हयथम वर्तमान इराक के एक मध्ययुगीन गणितज्ञ, खगोलशास्त्री और भौतिक विज्ञानी थे। उन्हें “आधुनिक प्रकाशिकी का जनक” (प्रकाश विज्ञान के जनक) कहा जाता है और “पहले सच्चे वैज्ञानिक” भी कहा जाता है। पश्चिमी दुनिया में अल हयतम को अल हेज़न (Alhazen) के नाम से भी जाना जाता है — इस्लामी स्वर्ण युग के सबसे महान वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और गणितज्ञों में से एक थे। उन्होंने विशेष रूप से प्रकाशिकी और दृश्य धारणा के सिद्धांतों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका सबसे प्रभावशाली काम किताब अल-मनाज़िर है, जो सात खण्डों में सन् 1011-1021 के दौरान लिखी गयी थी। इनकी किताब प्रकाशिकी का अनुवाद 12वीं शताब्दी के अंत में या 13वीं शताब्दी की शुरुआत में एक अज्ञात विद्वान द्वारा लैटिन भाषा में अनुवाद भी किया गया था, लैटिन अनुवादों के ज़रिए उनका ज्ञान गैलीलियो, केप्लर, और डेसकार्टेस तक पहुंचा । इनके कार्यों को वैज्ञानिक क्रांति के दौरान आइजैक न्यूटन, जोहान्स केपलर, क्रिस्टियान ह्यूजेंस और गैलीलियो गैलीली द्वारा अक्सर उद्धृत किया गया था । इयान पी. हॉवर्ड ने 1996 के परसेप्शन लेख में तर्क दिया कि अल्हाज़ेन (इब्ने अल हयथम) को कई खोजों और सिद्धांतों का श्रेय दिया जाना चाहिए, जिन्हें पहले पश्चिमी यूरोपीय लोगों द्वारा सदियों बाद लिखने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
इनका जन्म सन्. 965 ई. ( सी. 354 एएच ) में बसरा, बुयिद अमीरात (अब इराक) में हुआ था और इनकी मृत्यु लगभग 1040 ( लगभग 430 एएच ) में 75 वर्ष की आयु में काहिरा (मिस्र) में हुई थी।
उन्होंने अपना अधिकांश समय फ़ातिमी राजधानी काहिरा में बिताया और कई किताबों की रचना करके और कुलीन वर्ग के लोगों को शिक्षा देकर अपनी जीविका अर्जित करते थे।
शुरुआती दौर में इस्लाम धर्म का अध्ययन और समाज सेवा करते थे। लेकिन उस समय समाज में धर्म के बारे में कई परस्पर विरोधी विचार थे, जिससे अंततः उन्होंने धर्म से अलग हटने की कोशिश की और उन्हें गणित और विज्ञान के अध्ययन में रुचि पैदा हुई। उन्होंने अपने मूल स्थान बसरा में वज़ीर की उपाधि के साथ एक पद संभाला और गणित के अपने ज्ञान के लिए प्रसिद्ध हुए। बाद में काहिरा लौटने पर उन्हें एक प्रशासनिक पद दिया गया :- फ़ातिमी खलीफ़ा, अल-हकीम बि-अम्र अल्लाह द्वारा नील नदी की बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए मिस्र बुलाया गया था। उन्होंने नील नदी की वार्षिक बाढ़ का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया और आधुनिक असवान बाँध के स्थान पर एक बाँध बनाने की योजनाएँ तैयार की । हालाँकि बाद में उनके क्षेत्रीय कार्य ने उन्हें इस योजना की अव्यवहारिकता का एहसास कराया और उन्होंने खलीफ़ा की सज़ा से बचने के लिए जल्द ही पागलपन का नाटक किया । जब वह इस कार्य को भी पूरा करने में असमर्थ साबित हुए तो उन्होंने खलीफा अल-हकीम का गुस्सा मोल ले लिया था। कहा जाता है कि 1021 में खलीफा की मृत्यु तक उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद उनकी जब्त की गई संपत्ति उन्हें वापस कर दी गई। यह भी किंवदंती है कि उन्होंने पागलपन का नाटक किया और इस दौरान उन्हें नजरबंद रखा गया था। इसी दौरान उन्होंने अपनी प्रभावशाली पुस्तक लिखी। कहा जाता है कि उनके छात्रों में सेमनान के एक फ़ारसी सोरखब (सोहराब) और मिस्र के राजकुमार अबू अल-वफ़ा मुबाशिर इब्न फतेक शामिल थे।
इब्न अल-हयथम यह समझाने वाले पहले व्यक्ति थे कि दृष्टि तब होती है जब प्रकाश किसी वस्तु से परावर्तित होता है और फिर किसी की आँखों में जाता है और यह तर्क देने के लिए कि दृष्टि मस्तिष्क में होती है, यह अवलोकन की ओर इशारा करते हुए कि यह व्यक्तिपरक है और व्यक्तिगत अनुभव से प्रभावित है।
अल हयतम ने बहुत सी किताबें लिखी हैं, उनमें से कुछ प्रमुख किताबें और योगदान यह हैं:-
- किताब अल-मनाज़िर
- तह़रीर अल-उक़्नीद
- मक़ाला फी ज़ुहूर अल-कमर
- अल-शुकूक ‘अला
- इब्ने अल हयथम ने कई अन्य ग्रंथ भी लिखे हैं, जिनमें उनका रिसाला फ़ि-दाव (प्रकाश पर ग्रंथ) भी शामिल है। उन्होंने प्रकाश, इंद्रधनुष, ग्रहण, गोधूलि और चांदनी के गुणों का अध्ययन किया। दर्पणों और हवा, पानी, काँच के घनों, गोलार्धों और चतुर्थांश-गोलों के बीच अपवर्तक अंतरापृष्ठों के साथ प्रयोगों ने उनके प्रकाशिकी सिद्धांतों की नींव रखी ।
- सात ग्रहों में से प्रत्येक की गति का मॉडल
अल्हाज़ेन की पुस्तक द मॉडल ऑफ़ द मोशन्स ऑफ़ ईच ऑफ़ द सेवन प्लैनेट्स लगभग 1038 में लिखी गई थी । केवल एक क्षतिग्रस्त पांडुलिपि ही मिली है, जिसमें केवल परिचय और ग्रहों की गति के सिद्धांत पर पहला खंड ही बचा है , इन्होंने ने कुल पच्चीस खगोलीय कार्य लिखे हैं।जिनका बहुत महत्व है।
- ज्यामिति:- प्रारंभिक ज्यामिति में, अल्हाज़ेन ने लून्स (अर्धचंद्राकार आकार) के क्षेत्र का उपयोग करके वृत्त का वर्ग करने की समस्या को हल करने का प्रयास किया I
- वैज्ञानिक विधि:- “प्रयोगात्मक स्थितियों को निरंतर और एक समान तरीके से अलग-अलग करने की विधि का व्यवस्थित उपयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे ।
- संख्या सिद्धांत:- संख्या सिद्धांत में अलहाज़ेन के योगदानों में पूर्ण संख्याओं पर उनका कार्य शामिल है । अपने विश्लेषण और संश्लेषण में, वह संभवतः यह बताने वाले पहले व्यक्ति थे कि प्रत्येक सम्पूर्ण संख्या के रूप की होती है ।
- गणना:- चतुर्थ घात के योग सूत्र की खोज की I
- धर्म-शास्त्र:- इस्लामी धर्म-शास्त्र पर एक काम लिखा, जिसमें उन्होंने पैगंबरी पर चर्चा की और अपने समय में इसके झूठे दावेदारों को पहचानने के लिए दार्शनिक मानदंडों की एक प्रणाली विकसित की। उन्होंने गणना द्वारा क़िबला की दिशा खोजने नामक एक ग्रंथ भी लिखा, जिसमें उन्होंने गणितीय रूप से क़िबला खोजने पर चर्चा की I
- रंग स्थिरता:- उन्होंने बताया कि प्रकाश की गुणवत्ता और वस्तु का रंग मिश्रित होते हैं और दृश्य तंत्र प्रकाश और रंग को अलग करता है।
इब्ने अल हयथम ने अल्लाह के बारे में कहा है कि:-
“मैं निरंतर ज्ञान और सत्य की खोज में लगा रहा और यह मेरा विश्वास बन गया कि ईश्वर के तेज और निकटता तक पहुँचने के लिए सत्य और ज्ञान की खोज से बेहतर कोई रास्ता नहीं है”।
मौजूदा दौर में कहा जाता है कि मुसलमानों का क्या योगदान है ? दरअसल हम हमारे गौरवशाली इतिहास को भुला बैठे हैं। मुसलमानों ने भी दुनिया के विकास में योगदान दिया है।
-फ़ज़लुर्रहमान
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