Loading...

“हर 6 में से 1 मरीज पर एंटीबायोटिक बेअसर: जानें क्यों और कैसे बचें एंटीबायोटिक प्रतिरोध से”

Jaipur

Follow us

Share

आज के समय में जब भी हम किसी इंफेक्शन या बुखार जैसी समस्या का सामना करते हैं, तो अक्सर सबसे पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से एंटीबायोटिक दवाइयों की सलाह लेने की सोचते हैं। एंटीबायोटिक दवाइयाँ बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को खत्म करने के लिए बनाई गई हैं। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट ने एक गंभीर सच उजागर किया है – हर 6 में से 1 मरीज पर एंटीबायोटिक दवाइयाँ असर नहीं कर रही हैं। इसका मतलब है कि दुनिया भर में बहुत सारे लोग एंटीबायोटिक दवाओं के बावजूद संक्रमण से पूरी तरह ठीक नहीं हो पा रहे हैं।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध: एक गंभीर खतरा

डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में बैक्टीरियल संक्रमण के मामलों में एंटीबायोटिक दवाइयों की प्रभावशीलता में भारी कमी आई है। खासकर यूरिनरी ट्रैक्ट और ब्लड फ्लो (रक्त संचार) में होने वाले इंफेक्शन में यह समस्या सबसे ज्यादा देखी गई। यह इसलिए हुआ क्योंकि इन बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध यानी रेजिस्टेंस विकसित हो गया है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध का मतलब है कि बैक्टीरिया अब उन दवाओं के प्रभाव को झेल सकते हैं, जो पहले उन्हें मारने में सक्षम थीं। जब बैक्टीरिया रेजिस्टेंट बन जाते हैं, तो संक्रमण बढ़ता है, इलाज कठिन होता है और मरीज को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है।

कौन से बैक्टीरिया ज्यादा खतरनाक हैं?

रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (जैसे मूत्र मार्ग में इंफेक्शन) और ब्लड इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया में सबसे ज्यादा रेजिस्टेंस देखा गया। इसके विपरीत, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन और यूरो-जेनिटल गोनोरिया (संक्रमण जो जननांग और यूरिनरी सिस्टम को प्रभावित करता है) के मामले में अभी रेजिस्टेंस का स्तर अपेक्षाकृत कम है। हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर इस दिशा में तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं की बेअसरता और भी गंभीर समस्या बन सकती है। इसका मतलब है कि आज की छोटी बीमारी भी भविष्य में जीवन-threatening हो सकती है।

क्या कारण हैं एंटीबायोटिक दवाइयों की बेअसरता के पीछे?

असावधानी से दवाइयों का सेवन
बहुत से लोग अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाइयाँ लेना शुरू कर देते हैं। कभी-कभी तो यह दवाइयाँ बिना डॉक्टर की सलाह के पूरी नहीं ली जातीं। सिर्फ तब तक खाई जाती हैं जब तक बुखार या संक्रमण का लक्षण कम हो जाए। यह सबसे बड़ी गलती है।

अधूरा इलाज
एंटीबायोटिक दवाओं का सही असर तभी होता है जब मरीज पूरी दवा को डॉक्टर के बताए गए समय तक पूरा करे। अधूरी दवा लेने से कुछ बैक्टीरिया बच जाते हैं और वे जल्दी रेजिस्टेंट हो जाते हैं।

बार-बार दवा का इस्तेमाल
बार-बार एंटीबायोटिक दवाएँ लेने से शरीर के भीतर बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इसका मतलब है कि अगली बार संक्रमण हुआ, तो वही दवाइयाँ काम नहीं करेंगी।

ग़लत दवा का प्रयोग
कभी-कभी मरीज वायरल इंफेक्शन में भी एंटीबायोटिक ले लेते हैं, जबकि एंटीबायोटिक दवाएँ केवल बैक्टीरियल संक्रमण पर असर करती हैं। वायरल बीमारी में इसका कोई फायदा नहीं होता और यह दवा प्रतिरोध पैदा करने में मदद करती है।

एंटीबायोटिक दवा बेअसर होने पर प्रभाव

जब एंटीबायोटिक दवा बेअसर हो जाती है, तो संक्रमण का इलाज करना कठिन हो जाता है। मरीज को ज्यादा समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है, और इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में मरीज की जान को खतरा भी हो सकता है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को नहीं रोका गया, तो 2050 तक दुनिया में हर साल 10 मिलियन लोगों की मौत एंटीबायोटिक प्रतिरोधक बैक्टीरिया के कारण हो सकती है।

एंटीबायोटिक दवाओं का सही इस्तेमाल कैसे करें?

सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर दवा लें: एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से कंसल्ट करें।

पूरा कोर्स पूरा करें: चाहे लक्षण तुरंत ठीक हो जाएँ, दवा की पूरी खुराक खत्म करें। इससे बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाते हैं और प्रतिरोध बनने का खतरा कम होता है।

बार-बार दवा लेने से बचें: बिना जरूरत बार-बार एंटीबायोटिक दवाएँ लेने से बचें। शरीर में बैक्टीरिया का प्रतिरोध बढ़ता है।

वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में अंतर जानें: सर्दी, खांसी, फ्लू जैसी वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक काम नहीं करती। केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में ही इसका इस्तेमाल करें।

सैनिटेशन और हाइजीन पर ध्यान दें: हाथ धोना, साफ-सफाई और सुरक्षित भोजन से बैक्टीरियल संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है।

भविष्य की चुनौती और समाधान

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल को नहीं रोका गया, तो भविष्य में सामान्य इंफेक्शन भी जानलेवा हो सकते हैं। इसलिए सरकारें और स्वास्थ्य संगठन सख्त नियम लागू कर रहे हैं। इनमें दवा की बिक्री पर नियंत्रण, अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और मरीजों में जागरूकता फैलाना शामिल है। हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह एंटीबायोटिक दवाओं का सही इस्तेमाल करे और डॉक्टर की सलाह के बिना इसे न ले। यदि हम यह ध्यान रखेंगे, तो एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता बरकरार रहेगी और भविष्य में गंभीर संक्रमणों से बचा जा सकेगा। एंटीबायोटिक दवाइयाँ हमारे स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं, लेकिन उनका गलत और बेवजह इस्तेमाल भविष्य में बड़े खतरे की वजह बन सकता है। WHO की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि हर 6 में से 1 मरीज पर यह दवाएँ असर नहीं कर रही हैं। इसका मुख्य कारण है एंटीबायोटिक प्रतिरोध।

हम सभी को चाहिए कि हम: केवल डॉक्टर की सलाह पर दवा लें, पूरी खुराक पूरी करें, बार-बार दवा का सेवन न करें, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण में अंतर समझें, हाइजीन और साफ-सफाई का ध्यान रखें।

 

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।