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गाजा युद्ध से इजरायली ताकत का भ्रम टूटा !

Jaipur

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इजरायल और हमास के बीच दो वर्षों तक चले लंबे युद्ध में जीत किसकी हुई यह आसानी से नहीं कहा जा सकता है। 1948  और 1967 में इजरायल और मुस्लिम देशों के बीच युद्धों में इजरायल एक तकनीकी सैन्य शक्ति वाला ताकतवर देश की पहिचान बन चुका था। लेकिन गाजा युद्ध ने इजरायल की सैन्य और तकनीकी ताकत का भ्रम तोड़ दिया। इजरायल की सैन्य तकनीकी एवं कूटनीति का ही भ्रम नहीं टूटा गाजा युद्ध में बल्कि इजरायल की कदम-कदम पर सहायता करने वाला अमेरिका भी विश्व में अपनी दादागिरी कम करा बैठा। जिस अमेरिका की धमकी के आगे विश्व के ज्यादातर देश डर जाते थे या फिर अमेरिका के सामने झुके हुए नजर आते थे, आज विश्व के ज्यादातर देश अमेरिका को आंख दिखाने की कोशिश करते हैं। इजरायल गाजा युद्ध से पहले पश्चिम एशिया का आक्रमक एवं कुछ भी करने वाला देश माना जाता था। इजरायल अपनी सुरक्षा को खतरा बताकर किसी भी पड़ोसी और दुरुस्त मुस्लिम देशों में मिसाइल और हवाई आक्रमण, जब चाहे और जहां चाहे कर देता था। कोई भी मुस्लिम देश इजरायल का मुकाबला करने की हिम्मत नहीं दिखा पाता था। इजरायल ने अपनी सुरक्षा का खतरा बताकर मुस्लिम देशों में सैकड़ो वैज्ञानिक, सैन्य कमांडर, राजनीतिकज्ञो एवं टेक्निशियनों को मौत के घाट उतार दिया। इजरायल ने बड़ी संख्या में मुस्लिम देशों में स्थापित रिसर्च सेंटर, एजुकेशन सेंटर, अस्पताल और औद्योगिक इकाइयों को हवाई हमले करके नष्ट कर दिया। इजरायल की आक्रामक नीतियों के कारण मुस्लिम देश अंदर खानें अपनी सैन्य शक्ति बढाते गए। इजरायल के खिलाफ कई सशस्त्र संगठन खड़े कर दिए। इजरायल अपनी सैन्य ताकत के भ्रम में फिलीस्तीन को कब्जाने की नीति पर काम करने लगा था। लेकिन यह नहीं जान पाया कि फिलीस्तीन की आजादी के लिए संघर्ष करने वाला हमास सैन्य संगठन उससे भी बड़ी तैयारी कर रहा है। 1967 में 7 मुस्लिम देशों पर विजयी रहने वाला इजरायल वर्तमान में छोटे-छोटे सैन्य संगठन हमास, हिज्बुल्लाह और हूती को दो वर्ष में भी नहीं हरा पाया। जो इजरायल हमास को समूल नष्ट करने की बात करता था, वही इजरायल ईरान से 12 दिन के युद्ध में बर्बादी के कगार पर पहुंच गया। ईरान से युद्ध में इजरायल के हवाई अड्डे, कॉलेज, रिसर्च सेंटर, सरकारी दफ्तर सैन्य ठिकाने बड़ी संख्या में बर्बाद हो गए। यदि अमेरिका युद्ध विराम नहीं करवाता तो इजरायल का कितना बुरा  हशर होता सोचा नहीं जा सकता है। गाजा युद्ध विराम से पहले इजरायल का तुर्कीए  के साथ तनाव चरम पर पहुंच गया था। तुर्कीए विश्व में 9 वे नंबर की सैन्य शक्ति माना जाता है। जबकि ईरान विश्व की 17 वे नंबर की सैन्य शक्ति वाला देश है। इजरायल की आक्रामक नीतियों के कारण मुस्लिम देश और उनकी जनता इजरायल को पसंद नहीं करती है। विश्व के देशों ने भी इजरायल द्वारा की गई 70 हजार फिलिस्तीनियों की हत्याओं की निंदा की और फिलीस्तीन को स्वतंत्र करने के पक्ष में (संयुक्त राष्ट्रीय संघ) में मतदान किया। गाजा से विश्व एवं मुस्लिम देशों के दबाव में इजरायल की सेना हट चुकी है। हमास ने इजरायली बंधियों को मुक्त कर दिया है। लेकिन इस गाजा युद्ध में इजरायल और अमेरिका की सैन्य तकनीकी ताकत का भ्रम मिट्टी में मिल गया।

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