सीजेआई पर जूता फेंकने का प्रयास न्यायपालिका व संविधान पर हमला- विपक्षी दल
नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर जूता फेंकने के प्रयास की लगभग सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने कड़ी निंदा की है। इन दलों में कांग्रेस, भाकपा, माकपा, राकांपा (एसपी), सपा, शिवसेना (यूबीटी) और द्रमुक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह संविधान एवं न्यायपालिका पर हमला है और यह दर्शाता है कि समाज में किस तरह नफरत एवं कट्टरता व्याप्त है। कांग्रेस ने पहले प्रधानमंत्री की आलोचना की और घटना के कुछ घंटों बाद तक उनकी चुप्पी पर सवाल उठाया और उसे शर्मनाक बताया। पार्टी ने इस घटना को मर्यादा का चौंकाने वाला उल्लंघन, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक खतरनाक नया निम्नस्तर और न्यायपालिका व संविधान की बुनियाद पर हमला बताया।
सोनिया गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश पर हुए हमले की निंदा करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। यह सिर्फ उन पर ही नहीं, बल्कि हमारे संविधान पर भी हमला है। प्रधान न्यायाधीश बहुत उदार रहे, लेकिन देश को गहरी पीड़ा और आक्रोश के साथ एकजुट होकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए।”
राहुल गांधी ने क्या कहा?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह हमला न्यायपालिका की गरिमा और संविधान की भावना पर हमला है। इस तरह की नफरत का हमारे देश में कोई स्थान नहीं है और इसकी ¨नदा की जानी चाहिए।
खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश पर हमले का प्रयास अभूतपूर्व, शर्मनाक और घृणित है। इस तरह की नासमझी भरी कार्रवाई दर्शाती है कि पिछले एक दशक में नफरत और कट्टरता ने हमारे समाज को कैसे जकड़ लिया है।
स्टालिन ने क्या कहा?
हमले की निंदा करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, ”हमलावर द्वारा अपने कृत्य के लिए बताई गई वजह दर्शाती है कि हमारे समाज में दमनकारी और पदानुक्रमित मानसिकता अभी भी कितनी गहराई तक मौजूद है।”
विजयन ने क्या कहा?
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी इस कृत्य की निंदा की और इसे संघ परिवार द्वारा फैलाई गई घृणा का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि इसे एक व्यक्तिगत कृत्य बताकर खारिज करना असहिष्णुता के बढ़ते माहौल की अनदेखी करना होगा।
शरद पवार क्या बोले?
राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, ”हमारे देश में फैलाया जा रहा जहर अब सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं का भी सम्मान नहीं करता। यह देश के लिए खतरे की घंटी है।”
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि मतभेद और असहमति हिंसा का कारण नहीं बन सकते और न ही बनने चाहिए। उम्मीद है कि इस निंदनीय कृत्य के लिए जिम्मेदार वकील पर कार्रवाई की जाएगी और उसका लाइसेंस रद किया जाएगा।
कपिल सिब्बल क्या बोले?
राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट बार के एक सदस्य के असभ्य व्यवहार की सभी को सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिए क्योंकि यह न्यायालय की गरिमा का अपमान है।” माकपा पोलित ब्यूरो ने इस घटना को हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों द्वारा समाज में फैलाए गए मनुवादी और सांप्रदायिक जहर का एक और उदाहरण बताया। कहा, यह संघ परिवार की असहिष्णुता और उनकी विचारधारा के विपरीत किसी भी विचार को स्वीकार करने की अनिच्छा को भी दर्शाता है। भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा, ”दक्षिणपंथियों द्वारा फैलाया गया सांप्रदायिक और जातिवादी जहर इस हद तक पहुंच गया है कि अब प्रधान न्यायाधीश, जो एक दलित न्यायाधीश भी हैं, को खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है। समाज में न्याय की स्थापना के लिए इस मानसिकता को उजागर करना, अलग-थलग करना और परास्त करना जरूरी है।” समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कृत्य को अहंकार से प्रेरित और दबंग लोगों की उपज बताया।
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