Loading...

ग़ज़ल

jaipur

default-image

Follow us

Share

वो  जो  झूठी  गवाही  देता  है

फिर ना  जीता ना  वो मरता है

देख रस्ते में  बिछ  गया  कांटा

देखना ये है  किसको चुभता है

ज़िंदगी  जब  नज़र  चुराए  तो

दिल है तन्हा बहुत सिसकता है

वो जो  धोखों में ढूंढता है सुख

ख़ुदबख़ुद एक दिन वो ढहता है

अपनी  कीमत लगा के देख तो

कौन  है  जो  तुझे   परखता  है

सायबानों  में जीना क्या जीना

धूप में आ – के कौन जलता  है

सुब्ह से शाम तक को भूल जा

चांदनी  में  बदन   पिघलता  है

फ़ज़लुर्रहमान

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।