सात सौ किलोमीटर दूर गए प्रिंसिपल: अलवर से बाड़मेर तक भेजा
1300 प्रिंसिपल का बिना आवेदन ट्रांसफर, देने होंगे भत्ते
बीकानेर (रॉयल पत्रिका) । शिक्षा विभाग ने एक ही आदेश में साढ़े चार हजार से ज्यादा प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए तो राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा उथल-पुथल हुई। जयपुर सहित राज्यभर के सैकड़ों टीचर्स को दो सौ से पांच सौ किलोमीटर लंबी दूरी तय करके अब नए स्थान पर काम करना होगा। ये किसी के लिए सजा साबित हुई है तो किसी के लिए राहत भरा आदेश है। दरअसल, विभाग ने उन टीचर्स को यात्रा सहित अन्य भत्ते देने पड़ रहे हैं, जिन्होंने ट्रांसफर के लिए आवेदन ही नहीं किया था। ऐसे प्रिंसिपल को हटाकर डिजायर वाले प्रिंसिपल को लगाया गया है। इस तबादला आदेश में राजस्थान के उन जिलों से भी प्रिंसिपल हट गए हैं, जहां से आमतौर पर ट्रांसफर अन्य जिलों में नहीं होते। डार्क जोन कहे जाने वाले पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश जिलों में पोस्टिंग करवाने के बाद प्रिंसिपल सहित अन्य टीचर्स वापस अपने गृह जिलों में चले जाते हैं। ऐसे में यहां पद फिर से रिक्त रह जाते हैं। इनमें जैसलमेर, बाडमेर, बांसवाड़ा, जालौर, सिरोही, बीकानेर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बारां और झालावाड़ है। यहां से बड़ी संख्या में प्रिंसिपल को फिर से उनके गृह जिलों में भेज दिया गया है। जिससे सीमावर्ती जिलों में स्कूल फिर से खाली हो गए।
जैसलमेर में कम हो गए 11 प्रिंसिपल-
जैसलमेर में कुल 96 प्रिंसिपल के ट्रांसफर हुए। इससे यहां 11 स्कूलों में अब प्रिंसिपल नहीं रहे दरअसल, जैसलमेर से जैसलमेर में तो महज बीस ही ट्रांसफर हुए हैं। शेष 74 प्रिंसिपल को जैसलमेर से अन्यत्र भेज दिया गया। सिफारिश और डिजायर के आधार पर ये प्रिंसिपल अपने-अपने गृह जिलों में चले गए। वहीं अन्य जिलों से जैसलमेर में भी तबादले हुए इससे ये संख्या बढ़कर 85 तक पहुंची, लेकिन 11 स्कूल फिर भी बिना प्रिंसिपल के रह गए। कमोबेश ऐसे ही हालात अन्य जिलों के भी है।
भरतपुर से छह सौ किलोमीटर दूर बांसवाडा ट्रांसफर-
बांसवाड़ा को इस ट्रांसफर लिस्ट से फायदा हुआ है। यहां से 72 प्रिंसिपल का ट्रांसफर हुआ लेकिन 79 की पोस्टिंग हुई। 92 में से 53 को तो बांसवाड़ा से बांसवाड़ा में ही इधर-उधर किया गया था। वहीं अन्य जिलों से भी 39 प्रिंसिपल को बांसवाड़ा में लगाया गया है। इसमें मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर से तीन प्रिंसिपल का ट्रांसफर साढ़े छह सौ किलोमीटर दूर बांसवाड़ा में किया गया है।
सात सौ किलोमीटर दूर से बाड़मेर ट्रांसफर-
कभी डार्क जोन में रहे बाडमेर को भी इस ट्रांसफर लिस्ट से फायदा हुआ है। दरअसल, यहां से 102 प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए गए हैं। जिसमें 37 को बाड़मेर में ही लगाया गया लेकिन 65 प्रिंसिपल बाडमेर छोड़ अपने गृह जिलों में या फिर सुविधाजनक जिलों में चले गए। वहीं बड़ी संख्या में प्रिंसिपल को अन्य जिलों से बाड़मेर भेजा गया है इसमें सर्वाधिक नागौर से बीस प्रिंसिपल साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर बाड़मेर भेजे गए हैं। चार प्रिंसिपल को तो अलवर से बाड़मेर भेजा गया है। दोनों जिलों के बीच सात सौ किलोमीटर की दूरी है करीब चार सौ किलोमीटर दूर अजमेर से भी सात प्रिंसिपल को बाडमेर भेजा गया है।
बिना आवेदन प्रति प्रिंसिपल एक लाख का खर्च-
अगर किसी प्रिंसिपल को सरकार बिना आवेदन किए ट्रांसफर करती है तो एक लाख रुपए का खर्च आता है। ऐसे प्रिंसिपल को नए पोस्टिंग स्थल पर जाने के लिए दस दिन की छुट्टी के रुपए, चार जनों के टिकट, करीब बीस हजार रुपए ट्रक ट्रांसपोर्ट के रुपए देने पड़ते हैं। इनके अलावा भी कई छोटे बड़े खर्च को मिलाकर एक लाख रुपए का सरकार को भुगतान करना पड़ता है।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
