विरार हादसा: चार मंजिला बिल्डिंग गिरने से 17 की मौत, बर्थडे पार्टी बनी मातमगाह
मुंबई । महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार में सोमवार रात हुआ दिल दहला देने वाला हादसा पूरे इलाके को झकझोर गया। विजय नगर इलाके में स्थित रमाबाई अपार्टमेंट की चार मंजिला बिल्डिंग अचानक ध्वस्त हो गई। इस हादसे में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और 9 लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर एक साल की बच्ची का जन्मदिन मनाया जा रहा था। खुशियों का माहौल देखते ही देखते मातम में बदल गया।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त की रात ठीक 12 बजकर 5 मिनट पर यह हादसा हुआ। रमाबाई अपार्टमेंट में करीब 50 फ्लैट बने हुए थे। देर रात अचानक इसकी 12 फ्लैटें बगल में बने एक खाली पड़े पुराने मकान पर गिर पड़ीं। हादसे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की कॉलोनियों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों का कहना है कि हादसा बेहद भयावह था। लोग मलबे में दबे लोगों की चीखें सुन रहे थे, लेकिन अंधेरा और भारी मलबा होने की वजह से तुरंत मदद करना आसान नहीं था।
बर्थडे पार्टी बनी मातमगाह
हादसे के वक्त चौथी मंजिल पर एक साल की मासूम बच्ची का जन्मदिन मनाया जा रहा था। रिश्तेदार और दोस्त जमा थे। अचानक पूरी बिल्डिंग हिलने लगी और देखते ही देखते पार्टी की रौनक खामोशी में बदल गई। बच्ची, उसकी मां और कई मेहमान इस मलबे के नीचे दब गए। सुबह तक चले रेस्क्यू अभियान में उनके शव बाहर निकाले गए। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।
रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। मंगलवार सुबह तक राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहा। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया गया। पहले दिन 12 लोगों के शव निकाले गए थे और बुधवार सुबह तक 5 और शव मिले। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने घटना पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। साथ ही घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि बिल्डिंग की मजबूती को लेकर पहले भी शिकायतें मिली थीं। हादसे के बाद अब पूरे इलाके में ऐसी इमारतों का सर्वे किया जाएगा, जो जर्जर हालत में हैं।
जिम्मेदारी का सवाल
यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी बिल्डिंग अचानक क्यों गिर गई? प्रारंभिक जांच में संभावना जताई जा रही है कि इमारत पुरानी थी और रख-रखाव नहीं हुआ। इसके बावजूद इसमें लोगों को रहने दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिसकी वजह से यह बड़ी त्रासदी हुई।
स्थानीय लोगों का दर्द
हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। लोग एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर कोई डरा हुआ और सदमे में है। चश्मदीदों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतना भयानक मंजर देखा। कई परिवारों के घर के सभी सदस्य इस हादसे में खत्म हो गए। विरार की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा भी लगती है। सवाल उठता है कि जर्जर इमारतों पर सख्ती क्यों नहीं बरती जाती? अगर समय रहते ऐसी इमारतों को खाली कराया जाता, तो मासूमों की जान बच सकती थी। एक मासूम की जन्मदिन की पार्टी को मातम में बदल देने वाला यह हादसा आने वाले समय में प्रशासन के लिए चेतावनी है कि अब और लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
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