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ईवीएम हैक की जा सकती है?

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महाराष्ट्र में भाजपा की पूर्व सहयोगी आरएसपी के प्रमुख महादेव जानकर ने आरोप लगाया है कि ईवीएम हैक की जा सकती है। उन्हौंने कहा कि मैं भी इंजीनियर हूँ। लोकतंत्र को जिंदा रखना है, तो मतपत्रों का इस्तेमाल करना होगा। कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ईवीएम हैकिंग और चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग से करीब – करीब सभी विपक्षो पार्टियो एवं बड़ी संख्या में इंजीनियरों ने मांग की है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है इसलिए चुनाव मतपत्रों से करवाएं जाएं। लोकतंत्र में चुनाव सत्ता की कुर्सी तक जाने का रास्ता है। निष्पक्ष चुनाव मजबूत लोकतंत्र की निशानी है। भारत में करीब एक दशक से ईवीएम से चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी पार्टिया और नेता ईवीएम से चुनाव के विरोध में सड़को पर उतरने की योजना बना रहे हैं। भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़ा एवं स्पष्ट लोकतंत्र माना जाता था लेकिन वर्तमान में चुनावों में गड़बड़ी एवं चुनाव प्रभावित करने की शिकायतें बड़े पैमाने पर नजर आने लगी हैं। महाराष्ट के एक उम्मीदवार ने शिकायत की कि जिस बूथ पर उसका परिवार रहता था जिसमें उसकी पत्नी, मां व भाई रहतें थे लेकिन उसको मात्र एक वोट ही प्राप्त हुआ। ऐसी शिकायतें ईवीएम से चुनाव पर शक पैदा कर रही है। कई बूथों पर और विधानसभा क्षेत्रों मे वोटिंग के समय मतदान संख्या और मतगणना के समय की संख्या में अंतर पाया गया। देश के बुद्धिजीवी सोचने पर मजबूर है कि क्या ईवीएम से चुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए फायदेमंद है। चुनाव आयोग विपक्षी नेताओं की शिकायतों पर क्यों ध्यान नही देता है़? क्या ईवीएम से चुनाव लोकतंत्र और जनता के साथ धेाखा बनता जा रहा है? जिन देशो मे ईवीएम बनाई गई थी, शुरुआत में वहां ईवाएम से ही चुनाव करवायें गए लेकिन जैसे ही ईवीएम में शिकायतें आने लगी उन देशो की सरकारों, उच्चन्यायालयों ने ईवीएम को यह कहकर बैन कर दिया कि ईवीएम देश की जनता और लोकतंत्र के साथ धोखा है। मजबूत लोकतंत्र के लिए मतपत्रों से ही चुनाव होने चाहिए। यही कारण है कि ज्यादातार विकसित देशो में मतपत्रों से चुनाव प्रक्रिया पूरी होती है। भारत में चुनाव आयोग ईवीएम पर आरोप लगाने वालों को कमी संतुष्ट नही कर पाता है। हमेशा चुनाव आयोग शिकायतों की लीपापोती करता रहता है। जबकि चुनाव आयोग को चाहिए कि देश के हैकरों , इंजीनियरों को 5-10 ईवीएम दे देनी चाहिए और फिर ईवीएम हैकिंग की खुली प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग ऐसा नही करता है। विपक्षी नेता यही आरोप लगा रहे है कि वर्तमान सरकार ने ईवीएम में प्रोग्रामिंग कर रखी है जिससे मन चाहे परिणाम निकाले जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि देश की जनता सरकार से नाराज है, युवाओं में बेरोजगारी है एवं देश में महंगाई है फिर भी फिर वर्तमान सरकार चुनाव में ईवीएम से जीत रही है। विपक्षी नेताओं के बयानों से लगने लगा है कि आने वाले समय में ईवीएम से चुनाव करवाने के विरोध में बड़ा आन्दोलन खड़ा किया जा सकता है। वैसे भी देश में लोकतंत्र की मजबूती एवं जनता का विश्वास मतपत्रों से चुनाव करवाने से ही कायम हो सकता है, क्योंकि ईर्वीएम पर देश की जनता अब शक करने लगी है।

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