30 एजुकेटर ने पैसों के लालच में रातों-रात बदला पाला
सादिक हिंदुस्तानी
जयपुर(रॉयल पत्रिका)। चैतन्य एकेडमी कोचिंग इंस्टिट्यूट और एजुकेटर पर अनएकैडमी कोचिंग संस्थान ने गंभीर आरोप लगाए है। जयपुर ग्रेटर के मानसरोवर डीसी और निगम की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या है कोई राजनीतिक दबाव! आखिर क्या है कहानी! यह बात केशव विहार गोपालपुरा बायपास मेन रोड की है। जिसकी एफआईआर जयपुर के महेश नगर पुलिस थाने में दर्ज की गई है। सर्व विदित है कि गोपालपुरा बायपास रोड जयपुर का एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है। जिसमें एजुकेशन के कई संस्थान मौजूद हैं। महेश नगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार संस्थान सोर्सिंग हेड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड अनएकैडमी संस्थान द्वारा शिकायत दर्ज कर श्री चैतन्य एकैडमी कोचिंग इंस्टिट्यूट और 30 एजुकेटर की मिली भगत से अनएकैडमी संस्थान का निजी व व्यवसायिक कॉन्फिडेंशियल डाटा चुराने, विद्यार्थियों को बरगलाकर भ्रमित करने,कोचिंग संस्थान के ब्रांड नेम की ख्याति को धूमिल करने,अनुचित रूप से करोड़ों रुपए प्राप्त करने,कोचिंग संस्थान के निजी दस्तावेज, लैपटॉप, मिनी टैब, ले जाने, तथा एक रात में अचानक मिली भगत करके 30 एजुकेटर का एक साथ जाना, धोखाधड़ी किए जाना, नीट और आईआईटी जैसे कोर्स को अधूरे में छोड़कर पैसों के लालच में आकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना जैसे गंभीर आरोप लगाये गए हैं। आगे बताया गया है कि संस्थान को हानि पहुंचाने एवं स्वयं को संदोष लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए श्री चैतन्य एकैडमी के नाम से हमारी संस्थान से 300 मीटर की दूरी पर ही कोचिंग सेंटर खोल कर एवं 30 लालची, लोभी, बेईमान, विश्वासघाती, एजुकेटर्स को बहला फुसलाकर हमारी अनएकैडमी कोचिंग संस्थान के साथ धोखाधड़ी तथा जालसाजी की गई है।जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह सब शिकायतें एफआईआर में दर्ज है। शासन से भी गुहार लगाई है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले, संस्था के साथ अनुबंधित होने के बावजूद भी कायदे कानून को तोड़ने वाले एजुकेटर्स के साथ सख्त कार्यवाही की जाए। दूसरी तरफ यहां पर जो बिल्डिंग है। जिसमें कुछ दिन पहले चैतन्य एकैडमी कोचिंग इंस्टिट्यूट प्रारंभ हुआ है।उसमें अभी निर्माण कार्य चल रहा है। वर्तमान में बिल्डिंग का टेंपरेरी शौचालय रोड पर बना हुआ है। जिसको स्टूडेंट भी उपयोग में ले रहे है।बेसमेंट का कार्य भी अभी चल ही रहा है। जगह-जगह विद्युत वायर खुले हुए हैं। बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर भी कार्य चालू है। जिससे स्टूडेंटों में खतरा और भी बड़ा हुआ नजर आ रहा है। आसपास जगह-जगह निर्माण सामग्री डाली हुई है। ऐसे में सवाल बनता है,क्या निर्माण स्वीकृति ली गई या नहीं,अगर ली गई तो क्या नियमानुसार निर्माण किया जा रहा है। क्या सुरक्षा के मापदंडों के साथ खिलवाड़ तो नहीं की जा रही है। जारी निर्माण के चलते इंस्टिट्यूट को बिना बिल्डिंग कंप्लीट हुए चालू करना स्टूडेंट के जीवन और भविष्य के साथ खिलवाड़ होता नजर आ रहा है। ऐसे में कोई दुर्घटना होती है तो कौन जिम्मेदार होगा ? शासन या प्रशासन। इसे कुछ दिन पहले मानसरोवर निगम द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर सीज करने का लेटर भी जारी किया गया था। क्या इंस्टीट्यूट द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत किए या नहीं सवालिया निशान है। या फिर कुछ और कहानी है। यह सर्च का विषय है।अभी हाल ही में कुछ बिल्डिंग,कोचिंग संस्थान और व्यावसायिक संस्थानों के दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर निगम सीजर की लगातार कार्यवाही कर रहा है। दिल्ली में हुए कोचिंग हादसे के बाद ग्रेटर नगर निगम की महापौर डॉक्टर सौम्या गुर्जर भी लगातार एक्शन मूड़ में है। अब देखते हैं शासन और पुलिस प्रशासन क्या कार्यवाही करता है। जिससे विद्यार्थियों एवं पेरेंट्स में विश्वास पैदा हो। अनएकैडमी कोचिंग संस्थान के संचालकों का कहना है कि ऐसे बेईमान एजुकेटर्स को ऐसी सख्त सजा मिले कि दुबारा कोई किसी संस्थान के साथ ऐसी हरकत न कर सके।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
