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मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास और उमर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

इलाहाबाद

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ट्रायल कोर्ट में सुनवाई पर रोक बढ़ी

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के गजल होटल मामले में माफिया मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के खिलाफ अधीनस्थ अदालत में चल रही कार्यवाही पर लगी रोक बढ़ा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिका पर जवाब के लिए अंतिम अवसर भी दिया है। इसके साथ ही अगली सुनवाई के लिए एक दिसम्बर की तारीख लगाई है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन ने अब्बास और उमर अंसारी की याचिका पर उनके अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय और सरकारी वकील को सुनकर दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

हाईकोर्ट ने इस मामले में जुलाई 2023 में अब्बास व उमर के खिलाफ लंबित मुकदमे की कार्यवाही और चार्जशीट पर रोक लगाई थी। तब सुनवाई के दौरान अब्बास और उमर के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने अपनी बहस में कहा था कि वर्ष 2005 में जब अब्बास एवं उमर अंसारी के नाम से विवादित जमीन की रजिस्ट्री कराई गई तब वे दोनों नाबालिग थे।

नाबालिग होने का आधार

नाबालिग होने के कारण उनकी तरफ से उनकी मां अफशां अंसारी ने रजिस्ट्री कराई थी। एडवोकेट उपेंद्र उपाध्याय ने यह भी कहा था कि याची घटना के वक्त नाबालिग थे तो उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसी आधार पर चार्जशीट पर रोक लगाते हुए अधीनस्थ न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगा दी थी।

गजल होटल केस में क्या है आरोप?

मामले में आरोप है कि मुख्तार अंसारी के परिवार ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर गजल होटल का निर्माण कराया था। अब्बास और उमर अंसारी को पिछले कुछ दिनों में अदालतों से कई राहतें मिली हैं। इससे पहले अब्बास अंसारी की सजा पर अदालत ने रोक लगा दी थी। इससे उनकी विधायकी भी वापस मिल गई थी। महीनों तक जेल में रहने के बाद अब्बास अदालत से मिली राहत के बाद ही बाहर भी आए थे। इसी तरह उमर को भी अब्बास की तरह लगातार राहत मिलने से मुख्तार परिवार में खुशियां लौटी हैं।

अगली सुनवाई

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले पर अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 1 दिसंबर तय की है। इस आदेश के बाद फिलहाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक बनी रहेगी।

निष्कर्ष

मुख्तार अंसारी परिवार को अदालतों से मिल रही लगातार राहतों ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आगामी सुनवाई में राज्य सरकार का रुख क्या होता है और अदालत इस पर क्या फैसला देती है।

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