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पान-चाय की दुकानों पर बिक रहा है नशा

जयपुर

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पान-चाय की दुकानों पर बिक रहा है नशा, पुलिस को नहीं पता
जयपुर शहर में स्कूल, कॉलेजो, घनी आबादी क्षेत्रों में पान चाय एवं किराना की दुकानों पर नशा धड़ल्ले से बिक रहा है। युवा छात्र, मजदूर लोग तेजी से नशा के आदी होते जा रहे है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार ने शुक्रवार को नारकोटिक्स टास्क फोर्स की बैठक में पान और चाय की दुकानों पर बिकने वाले नशा पर चिंता व्यक्त की और इन दुकानों की मॉनिटरिंग और औचक निरीक्षण के लिए अभियान चलाने की जरूरत पर जोर दिया। जयपुर सहित राज्य के अन्य शहरों में नशे का चलन बढ़ता जा रहा है। अफीम, स्मैक और गांजा सेवन करने वाले युवा और मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। समाज में बढ़ती नशा की प्रवृति देश की बर्बादी की पहली सीढ़ी है। नशा रोकने के लिए पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की जिम्मेदारी होती है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि गृह विभाग के अधिकारियों को जानकारी है कि शहर में पान और चाय की दुकानों पर नशा बेचा जा रहा है। जनता में अधिकतर लोग जानते है कि पान, चाय, किराना एवं मेडीकल की दुकानों पर नशा बेंचा जा रहा है। लेकिन जगह जगह जयपुर शहर एवं प्रदेश में खुले हुए पुलिस थानों के कांस्टेबल, हैड कांस्टेबल, सब-इंसपेक्टर और थानाधिकारियों को पता नहीं लग पा रहा है कि उनके क्षेत्र में नशा कहां बिकता है और कौन बेचता है ? इसलिए नशा बेचने वाले माफिया दिनरात फलफूल रहे है। वैसे माना जा रहा है कि किसी भी थाना क्षेत्र में बिना पुलिस की जानकारी के एक माचिस की तीली नही बिक सकती है। पुलिस की जानकारी में थाना क्षेत्र की छोटी मोटी सभी तरह की गतिविधियों रहती है। फिर ऐसा कौनसा कारण है कि नशा और नशा से संबधित वस्तुएं क्यों उसकी नजर से बच रही है। यह केवल पुलिस सोचती है कि नशे की हमे जानकारी नही है जबकि जनता और जनता के सभी प्रबुद्ध लोग जानते है कि देश में लोगों की सुरक्षा के अलावा समाज में नशे का कारोबार पुलिस के सरंक्षण में ही बढ़ रहा है। पुलिस में भी समाज से आए लोग नौकरी करते है। उनकी भी जिम्मेदारी समाज और देश के प्रति तो कुछ बनती है। लेकिन पैसे के लालच में कुछ पुलिस वाले, और नशा माफिया युवाओं और मजदूरो को बर्बाद कर रहे है। के लिए ठोस कदम साथ में जनअभियान इसलिए सरकार को चाहिए की समाज को, राज्य को नशामुक्त करने उठाएं। नशा रोकने के लिए थानाधिकारियों की भागीदारी बहुत जरूरी है चलाकर लोगों को जागरूक बनना भी आवश्यक है।

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