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इंदौर छोड़िए, जयपुर की ‘नहारी का नाका’ बस्ती में गटर के पानी से गुजर रहे नमाजी

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-‘स्वच्छ राजस्थान’ के दावों की खुली पोल

-शास्त्री नगर की बंदा बस्ती में नारकीय हालात; रमजान भर गंदगी में रहे लोग, अब ईद पर भी राहत की उम्मीद नहीं

हरि चौधरी

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान सरकार और नगर निगम के अधिकारी भले ही जयपुर को सफाई के मामले में इंदौर से आगे ले जाने के दावे करते हों, लेकिन हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। राजधानी के शास्त्री नगर स्थित नहारी का नाका (बंदा बस्ती) में नगर निगम की लापरवाही ने आम जनजीवन को नारकीय बना दिया है। यहां की सड़कों पर बहता गटर का गंदा पानी और कचरे के ढेर ‘स्वच्छ भारत मिशन’ का मखौल उड़ा रहे हैं।

रमजान भर गंदगी का पहरा, ईद की पूर्व संध्या पर भी बेहाल

मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार ‘ईद’  भी निकल गया है, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए खुशियां गंदगी के साये में दबी हैं। अलविदा जुमे की नमाज के बाद बाहर निकले नमाजियों को गटर के पानी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरा रमजान का महीना इसी गंदगी के बीच बीत गया। क्षेत्रीय निवासी अब्दुल कलाम अंसारी ने बताया कि पार्षद और निगम के जमादार को कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

निगम की गाड़ी को पैसे देने को तैयार हैं लोग

रिपोर्ट के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। स्थानीय निवासी शायदा ने बताया कि गंदगी से परेशान होकर लोग अपनी जेब से पैसे (करीब रु. 500) इकट्ठा कर निगम के कर्मचारियों को देने को तैयार हैं ताकि सफाई हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम की गाड़ियां आती हैं और औपचारिकता पूरी कर चली जाती हैं, लेकिन चेंबर और नालियों की सफाई नहीं होती।

पार्षद और अधिकारियों की दलील: ‘जनता जागरूक नहीं’

जब इस संबंध में क्षेत्रीय पार्षद (निवर्तमान) से बात की गई, तो उन्होंने सफाई के दावों को सही ठहराते हुए गेंद जनता के पाले में डाल दी। पार्षद का कहना था कि जनता जागरूक नहीं है और कचरा गाड़ी आने के बाद सड़कों पर गंदगी फैलाती है। वहीं, निगम के जमादार सुनील कुमार ने ‘तकनीकी खामी’ का हवाला देते हुए कहा कि मामला दो वार्डों (वार्ड 19 और 23) की सीमा का है। उन्होंने दावा किया कि आज शाम तक गटर लाइन और चेंबर को दुरुस्त कर दिया जाएगा।

बदहाली के मुख्य कारण:

गलत ड्रेनेज सिस्टम: 500-600 मकानों का कनेक्शन एक ही लाइन में होने से चेंबर ओवरफ्लो हो रहे हैं।

अधिकारियों की अनदेखी: स्थानीय जमादार और अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई न करना।

सीमा विवाद: दो वार्डों के बीच तालमेल की कमी के कारण सफाई व्यवस्था ठप।

संसाधनों का अभाव: सड़कों से कचरा उठाने और चेंबर साफ करने वाली मशीनों की अनियमितता।

क्या इंदौर को पीछे छोड़ेगा जयपुर?

जयपुर के सफाई कर्मचारी भले ही मेहनत का दावा करें, लेकिन शास्त्री नगर जैसे इलाकों के हालात देखकर यह सवाल लाजिमी है कि क्या जयपुर कभी इंदौर जैसी स्वच्छता हासिल कर पाएगा? जहाँ त्योहारों के समय भी नमाजी और राहगीर गंदगी में चलने को मजबूर हैं, वहां ‘चमचमाती सड़कों’ के दावे केवल कागजी नज़र आते हैं।

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