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मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस ने उमर खालिद को राजस्थान से राज्यसभा भेजने की मांग उठाई

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राजस्थान में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच विभिन्न मुस्लिम संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेतृत्व से अपील की है कि उमर ख़ालिद को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया जाए। संगठनों ने इसे “संवैधानिक मूल्यों और समावेशी राजनीति के प्रति प्रतिबद्धता की कसौटी” बताया है।

राजस्थान से जून में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के दो सीटें जीतने की संभावना है, जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट आने का अनुमान है। ऐसे में यह मांग कांग्रेस की संभावित एकमात्र सीट को लेकर की जा रही है।

राजस्थान मुस्लिम अलायंस के अध्यक्ष मोहसिन रशीद टोंक ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को लिखे पत्र में इस संबंध में औपचारिक अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, उमर ख़ालिद का चयन न केवल एक योग्य व्यक्ति को मंच देगा, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देगा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा करने वाली आवाज़ों के साथ खड़ी है।” उन्होंने आगे कहा, “ऐसे समय में जब नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर बहस चल रही है, यह निर्णय पार्टी की न्याय, समावेशिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।”

कॉंग्रेस को मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को स्वीकार करना चाहिए :

पत्र में 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए मुस्लिम समुदाय की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। उल्लेखनीय है की “कांग्रेस के कुल मत प्रतिशत में लगभग 10 प्रतिशत योगदान मुस्लिम मतदाताओं का रहा, यानी पार्टी को मिलने वाले हर चार में से एक वोट इस समुदाय से आया। यह केवल सुझाव नहीं, बल्कि एक न्यायसंगत और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मांग है।”

इस मांग का समर्थन करते हुए मुस्लिम प्रोग्रेसिव फ़ेडरशन के कन्वीनर अब्दुल सलाम जौहर ने माँग की और कहा कि काँग्रेस पार्टी के आला नेतृत्व को राज्य में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को स्वीकार करना चाहिए। जौहर ने कहा कि “राजस्थान कांग्रेस के कई प्रमुख नेता ऐसे क्षेत्रों से जीतकर आते हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक वास्तविकता है।”

जौहर ने आगे कहा, “ऐसे में कांग्रेस पार्टी का दायित्व बनता है कि वह इस निरंतर समर्थन को सार्थक प्रतिनिधित्व के माध्यम से सम्मान दे।” उल्लेखनीय है कि उमर ख़ालिद जो पूर्व जेएनयू दिल्ली के छात्र नेता हैं, 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत न्यायिक हिरासत में हैं। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उनका मामला राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।

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