मुस्लिम गरीब बस्तियों में युवा बन रहे हैं नशे के आदि
-गांजा, चरस, स्मैक एवं नशे के रसायनों का सेवन कर रहे हैं नशेड़ी |
-पुलिस महकमा और सरकार नशे की तस्करी को रोकने के पूरे प्रयास कर रही है फिर भी नशा सभी जगह उपलब्ध है।

जयपुर। एक सर्वे में बताया गया है कि देश के मुसलमान की प्रति व्यक्ति आमदनी में बढ़ोतरी हुई। आमदनी बढ़ने के तथ्य कितने सत्य हैं ये तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन प्रदेश एवं देश की गरीब मुस्लिम बस्तियों में नशा करते युवाओं और बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है। मुस्लिम वर्ग में अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ रही है। मुस्लिम समाज शिक्षा में पिछड़ा होने के कारण सामाजिक सुधार की गति काफी धीमी है। मुस्लिम विधायक, चेयरमैन,व्यवसाय, शिक्षाविद एवं समाजसेवी केवल नाम एवं समाज में स्टेटस बनाए रखने के लिए समाज सेवा का दिखावा कर रहे हैं। यही कारण है कि मुस्लिम क्षेत्रों में उच्च स्तर का एक भी प्राथमिक, मिडिल, सेकेंडरी एवं कॉलेज नहीं है जहां बच्चों का कैरियर बन सकें। वर्तमान में मुस्लिम समाज के लोग शिक्षा से ज्यादा शादी, जन्मदिन, खाने की दावतों सहित गैर जरूरी कामों पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसलिए मुस्लिम समाज पिछड़ता जा रहा है। राजनीतिक जागरूकता के अभाव में मुस्लिम समुदाय पॉलिटिकल पार्टियों का वोट बैंक बन गया है। सरकार किसी भी पार्टी की बने मुस्लिम वर्ग के विकास को प्राथमिकता नहीं देती है।
नशे के कारण परिवार हो रहे हैं बर्बाद:- राज्य सरकार और सरकार का पुलिस महकमा नशे को रोकने के लिए ऑपरेशन क्लीन स्वीप चल रहा है। जिसके तहत सैकड़ों नशे के तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन जयपुर सहित प्रदेश के हर गांव से लेकर शहर तक नशा बिक रहा है। नशे के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं। एक बार परिवार में कोई सदस्य नशे का आदि हो जाता है तो धीरे-धीरे या तो पूरा परिवार चपेट में आ जाता है या फिर उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर एवं दयनीय हो जाती है। ऐसा परिवार जिसका कोई सदस्य नशा करता है उसका काम धंधा चौपट हो जाता है और बीमारियों के इलाज में खर्च शुरू हो जाता है। नशेड़ी युवा वक्त से पहले ही मर जाते हैं। बाद में घर की महिलाएं बच्चों का पालन पोषण करने के लिए गलत रास्ते पर चली जाती हैं।
नशे को रोकने की कोशिश:- नशे को रोकने के लिए जयपुर जैसे शहर में संस्थाएं बनी हुई हैं। लेकिन यह संस्थाएं एवं इन संस्थाओं से जुड़े लोग दिखावे की समाज सेवा के लिए काम करते दिखाई दे रहे हैं। जो लोग नशे को रोकने के लिए ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, उन्हें नशा तस्करी करने वाले और पुलिस के लोग धमकाते रहते हैं। ऐसे में नशा रोकना मुश्किल हो रहा है। समाज में नशा तब ही रुक सकता है जब थाने को जिम्मेदार बनाया जाए। थाना क्षेत्र में बिना पुलिस की जानकारी के नशा तो बहुत दूर की बात है एक माचिस की तीली भी नहीं बिक सकती है। लेकिन जयपुर के सभी थाना क्षेत्र में नशा बिक रहा है और नशेड़ी खरीद रहे हैं। समाज के प्रबुद्ध लोगों को भी नशे के खिलाफ अभियान चलाने की जरूरत है जिसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी हो।
विधायकों एवं पार्टियों के कार्यकर्ताओं का क्या योगदान:- जयपुर शहर में आठ विधायक हैं। जिनमें से पांच भाजपा और तीन कांग्रेस के विधायक हैं। सभी विधानसभा क्षेत्र की गरीब बस्तियों में नशा धड़ल्ले से बिक रहा है। माना जाता है कि यदि विधायक और पार्टी के कार्यकर्ता यह ठान ले तो उस विधानसभा क्षेत्र में नशा नहीं बिक सकता है। विधायक क्षेत्र की ताकतवर हस्ती होता है। जनता में उसकी पकड़ होती है। यदि विधायक अवैध नशा रोकने की पहल करता है तो वहां नशा नहीं बिक सकता है। आश्चर्य देखिए जयपुर शहर में दो मुस्लिम विधायक हैं और एक कट्टर हिंदू विधायक है। इनको तो अवैध नशा का विरोध करना चाहिए। लेकिन विधायक रफीक खान के क्षेत्र आदर्श नगर, अमीन कागजी के क्षेत्र किशनपोल और कट्टर हिंदू एवं संत विधायक बाबा बालमुकुंद के क्षेत्र में धड़ल्ले से सबसे ज्यादा अवैध नशा बिक रहा है। इसीलिए कहा जा सकता है कि धर्म की आड़ में राजनीति और पैसे का समाज में बोलबाला है।
अवैध नशे को लेकर अमीर व्यवसाय, सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी क्यों चुप हैं-
ज्यादातर अमीर और बड़े व्यवसायी ही समाजसेवी और राजनीतिज्ञ बन गए हैं। इनको समाज में अवैध नशे के चलन की पूरी जानकारी है। लेकिन इनकी सोच रहती है कि अभी हमारे परिवार का कोई सदस्य नशा करता नहीं है और दूसरे परिवार बर्बाद हो रहे हैं तो हम क्या कर सकते हैं। इस तरह सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी भी यही सोचते हैं कि हम हमारे परिवार के सदस्य तो नशे में शामिल नहीं दूसरों से हमें क्या लेना देना। इसी सोच के चलते समाज में अवैध नशा बढ़ रहा है। यह दोनों वर्ग पुलिस सरकार एवं विधायकों से मिलकर अवैध नशा रुकवा सकते हैं। अमीर व्यवसायी, सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों को अवैध नशा तब ही बुरा लगने लगता है जब उनका बेटा, भाई, पोता या अन्य रिश्तेदार अवैध नशे की चपेट में आ जाता है। समाज में इस प्रवृति के कारण नशे पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
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