डबल इंजन की सरकार गहलोत सरकार की धूल के बराबर भी नहीं: रघु शर्मा
पीसीसी में पूर्व चिकित्सा मंत्री ने राज्य सरकार को घेरा,आरजीएचएस, मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगाए गंभीर आरोप
जयपुर। राजस्थान की भजनलाल सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर कड़े प्रहार किए। डॉ. शर्मा ने कहा कि जिस ‘डबल इंजन’ की सरकार का हवा बनाया जा रहा था, वह अशोक गहलोत की ‘सिंगल इंजन’ सरकार के विकास कार्यों की धूल के बराबर भी नहीं है।
आईपीजी टावर का काम जस का तस
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार के समय एसएमएस अस्पताल में शुरू किया गया 24 मंजिला ‘आईपीडी टावर’ प्रोजेक्ट अब ठंडे बस्ते में है। उन्होंने कहा, “हमने 1200 बेड की सुविधा वाला यह प्रोजेक्ट एक समय सीमा में शुरू किया था, लेकिन आज सरकार इसकी प्रगति को लेकर गुमराह कर रही है। कोई प्रोजेक्ट रबड़ नहीं है जिसे आप खींचते जाएं, उसकी समय सीमा तय होनी चाहिए।
मेडिकल कॉलेजों की अनदेखी का आरोप
डॉ. शर्मा ने पिछली सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में एक साथ 17 मेडिकल कॉलेज खोले गए थे। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य हर जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलना था, लेकिन वर्तमान सरकार ने नए जिलों में स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों की फाइलों को या तो नजरअंदाज कर दिया है या निरस्त कर दिया है। जालौर और राजसमंद जैसे जिलों में मेडिकल कॉलेज की प्रगति न होने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
आरजीएचएस और चिरंजीवी योजना पर संकट
डॉ. शर्मा ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि क्या आरजीएचएस (RGHS) के तहत दवाओं की सप्लाई बंद होने की कगार पर है? उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट एलोकेशन में भारी कमी की है, जिससे बिलों का भुगतान पेंडिंग है। साथ ही, उन्होंने निशुल्क इलाज की सीमा पर भी स्पष्टता मांगी। उन्होंने कहा, “हमने 25 लाख का कैशलेस इलाज दिया था, आज सरकार यह बताने की स्थिति में नहीं है कि वह जनता को कितना बीमा कवर दे रही है।”
मरीजों को किया जा रहा है परेशान
एसएमएस अस्पताल का अपना अनुभव साझा करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि पारदर्शिता और फ्रॉड रोकने के नाम पर गंभीर मरीजों को परेशान किया जा रहा है। एमआरआई जैसी जांचों के लिए मरीजों को स्ट्रेचर पर एक कोने से दूसरे कोने (धन्वंतरि) फोटो खिंचवाने के लिए ले जाना पड़ता है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लाचारी भरा है।
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